जो थे हमारे सरताज।
छोड़ कर चले गए दिल में दबे रह गये अनकहे अल्फाज।।
न जाने क्या खता हुई दबे पाँव बेआवाज।
आँसुओं में बह गए अनकहे अल्फाज।।
न मिला जीवन में सुख।
प्रेम की चौखट पर खड़े खाली हाथ।
बीरान आँखों में बस गए अनकहे अल्फाज।।
खुशी और गम आज मिले इस तरह।
ठगे से हम रह गए देखते सूरत।
दिल ही दिल में रह गए अनकहे अल्फाज।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित आशा श्रीवास्तव जबलपुर
