एक तरफ स्वाभिमान है, दूसरी तरफ अभिमान।
दोनों के बीच है यह दीवार।।
एक तरफ अपमान है, दूसरी तरफ है सम्मान।
दोनों के बीच फिर भी है प्यार।।
एक तरफ स्वाभिमान है——————।।
एक तरफ चाहत है , दूसरी तरफ है नफरत।
दोनों के बीच इसी से है तकरार।।
एक तरफ आवाज है , दूसरी तरफ है लियाज।
दोनों के बीच कुछ तो है इंतजार।।
एक तरफ स्वाभिमान है——————।।
एक तरफ सच है , दूसरी तरफ है शक।
दोनों के बीच फिर भी है एतबार।।
एक ओर दिल में दोस्ती है, दूसरी ओर है दिल में दुश्मनी।
दोनों के बीच इसीलिए नहीं है इजहार।।
एक तरफ स्वाभिमान है——————।।
फिर भी मालूम है उसको भी और मालूम इसको भी।
जवाब दोनों के पास है और सवाल है हजार।।
दोनों कुछ भी नहीं कहे , मगर सूरत दोनों कहती है।
दोनों के बीच कुछ तो है ,चाहे हो एकतरफा प्यार।।
एक तरफ स्वाभिमान है ———————–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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