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क्या है दिल मे उसके वो कभी कहता नहीं है
आते जाते राहो मे अक्सर सामने से गुजरता है
जाने क्यूँ नहीं भाता है उसे मुझे किसीसे बाते भी करना
इतना वो घूरती आंखें उसके बयां कर जाता है
क्यूँ मिलता है कुछ आदते मेरे और उसके
ये पहेली भी ये दिल कभी समझ पाता नहीं है
कभी चाहे वो हमसे बाते करना कुछ पल बैठ कर
वो कहता नहीं, पर वो घूरती आंखें सब बयां कर जाता है
कश्मकश मे तो हम भी है इस बात से
कौन लगता है मेरा वो जो अब तक अजनबी सा है
न प्यार, न कोई अहसास लिए यूँ देखना हमें
कैसे बताये की वो घूरती आंखें हमें कितना चुभता है
इन्ही कुछ उलझन से चूर हमने दिल से कुछ सवाल की
की क्या है ये माजरा जो तेरे अंदर भी कुछ बात है
कभी लगता है वो कोई दुश्मन कभी अपनों सा
या वो घूरती आंखें करता कुछ गहरा सवाल भी है
दिल यूँ धड़कन से कहाँ ऐसा कुछ उसका छुपा राज़ है 
 ये वो मुसाफिर है इश्क़ के महफिल मे जिसे आख़री बार देखा गया 
सम्भल कर गुजरना इश्क़ के राहो से तुम भी नैना ज़िन्दगी मे
बहुत तकलीफ देता है जो घूरती आंखें भी दिलो को सुकून दें जाता है…!!
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नैना… ✍️✍️✍️
काल्पनिक…
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