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क्या खूब ज़िन्दगी पाया है तुमने भी
ए कोरा कागज़ खूब किस्मत तेरा भी है
करता नहीं कभी अपने हाले किसी से
पर हर किसी का हाल चुप चाप सून लेता है
कभी कोई तुझपे अपनों की खुशियाँ लिखते है
आँखों के नमी के साथ होठों की मुस्कुराहट लिखते है
रोता है तू भी उनके गम मे खुशी मे खिलखिलाता है
कहता नहीं कभी किसीसे हर राज़ छुपा लेता है
कभी लिख देते है कोई अपने इश्क़ का अहसास तुझपे
तो किसी के दर्द-ए-बयां का हमदर्द बन जाता है
है तो तू एक टुकड़ा कागज़ का इस दुनिया के लिए
पर हज़ारो दिलो तक दिल के अहसास पंहुचा देता है
कितना महत्व है तेरी ए कागज़ इंसान के ज़िन्दगी मे
जो हर फ़ैलसा जीवन के तुझपे हस्ताक्षर से होने लगे है
रह नहीं गया दिलो मे विश्वास जुबाँ से कहीं बातो की
जाने कैसे तु आसानी से ज़िन्दगी मे सबकुछ सह लेता है
हर किसी के तरह मैं भी तुझपे अपना अहसास लिखती हूँ 
तेरे पन्नों पर ग़ज़ल लिखकर सुकून महसूस करती हूँ
जाने क्या बात है तुझमे जो हर हाल-ए-बयां करने को दिल करता है
क्या खूब अंदाज़ है तेरा जो कागज़ होकर हर किसीको महबूब बना लेता है
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नैना…. ✍️✍️
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