आपकी वीरता और कर्तब्य निष्ठा को सत सत नमन।
आपकी कुशलता के लिए हम सभी भारत वासी परमपिता परमेश्वर से प्रार्थी बने रहते हैं।आपको किस पद का सम्बोधन दे;मन भाव विभोर हो जाता है,आप ही तो हैं जिसने मां की सिन्दूर को सलामत रखा है …एक बहन की राखी का लाज रखा है ….मां अपने सुत को गले लगाने को आतुर हो जाती है,किन्तु इन सबका श्रेय आपको जाता है ….हे वीर शिरोमणी! आपकी त्याग की गाथा हम सुनते और देखते हुए आ रहे हैं। प्रति पल प्रति छड़ आप मुसीबतों का सामना करने के लिए कटिबद्ध रहते हैं …तभी तो हम नागरिक अपने घर में अपने परिवार के साथ आनंद पुर्वक रहते हैं।
हे वीर शिरोमणि वो मां धन्य हैं जिसने तुम जैसे वीर को जन्म दिया है।नमन करते हैं उस पिता को जिसने तुम्हारे बाजुओ मे सौर्य भरा …नत मस्तक हैं उस परिवार के समक्ष जिसने आपको देश की रक्षा के लिए समर्पित किया …हे वीर!माँ को तो इस बात की खबर भी नहीं होती ,की मेरा लाल जो वर्दी पहन के शुशोभित है,वह वर्दी में आएगा या तिरंगे में ..?यह लिखते हुए मेरी आंखे सजल हो रही है पर वो हिन्दूस्तान की देवी तनिक भी विचलित नहीं होती हैं …और एक मां की गोद से दूर तुम एक माँ की गोद में समा जाते हो।
अब तो मेरी प्रबल जिज्ञासा यही रहेगी-
उस वीर पु रुष की वीर गति को आत्म सात कर के देखो
यह हृदय प्रफुल्लित होगा विरो का उद्भव कर के देखो….
हर घर में आप जैसा वीरउत्पन्न हो और हमारा हिन्दूस्तान आपकी सौर्य गाथा का प्रतीक बना रहे।
आपकी कुशलता की  कामना करते हुए
एक भारतीय ।
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