भारत की मिट्टी ने गौरव ऐसा पाया था
प्रकृति ने भी हर्षोल्लास मनाया था 
अठारह सौ तिरसठ बारह जनवरी था 
जन्म लेकर एक युगपुरुष आया था 
विश्वनाथ दत्त माता भुवनेश्वरी का लाल था 
हिन्दुस्तान का चमकाया जिसने भाल था 
नरेंद्र नाम से माता,पिता,समाज ने पुकारा था 
ज्ञान को ही जिसने बनाया अपना ढ़ाल था 
जन जन के कल्याण में जिसने जीवन लगाया 
सन्यासी बन रामकृष्ण परमहंस सा गुरु पाया 
गुरु का आशीर्वाद विवेकानंद था नाम मिला 
घूम घूम संदेशों संग भारत का परचम लहराया 
अध्यात्म बिन जगत है सूना,अलख जगाया था 
पैरों में ना थी बेड़ी,विश्वास ना कभी डगमगाएगा था 
आत्मा की उन्नति ही युवाओं के लिए दिया संदेश था 
शिक्षा ही है स्वाभिमान की धुरी,जग को बतलाया था 
शब्दों में उनके उत्साह, उमंग, प्रेरणा, उल्लास था 
आया जो धरा पर इक दिन उसको जाना था 
चार जुलाई सन उन्नीस सौ दो काल सम्मुख था 
ईश्वर की भक्ति जगाने वाला ईश्वर में समा गया था 
आरती झा(स्वरचित व मौलिक) 
दिल्ली
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