पापा जी के मन को थोड़ी राहत मिली.. अमन को हमारे जाने से कोई एतराज नहीं है.! रक्षाबंधन नजदीक है.. वहाँ से अभिनव के साथ जाकर अर्चना के पसंद का  गिफ्ट भी खरीद लूंगा..कितनी भोली है अर्चना..अपनी माँ जैसी..इतना स्वस्थ हूँ मैं..फिर भी उसे दूबला ही नजर आता हूँ.. यहाँ बाहर निकलने का कोई मार्ग नहीं नजर आता.. अमन बड़ा आदमी हो गया है.. उसके पास फूर्सत भी कहाँ है अब..इसमें बुरा ही क्या है..? मैं भी तो यही चाहता था..बहू- बेटे सुखी हैं इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है !” 
पापा जी को अमन का बचपना याद आने लगा और चेहरे पर मुस्कान आ गई! 
फोन के रिंग ने अतीत से पुनः वर्तमान के धरातल पर ला दिया! 
अभिनव का फोन था.! 
पापा जी फोन रिसीव करते ही बोल पड़े – 
“हाँ बेटा! कैसे हो?” पापा जी की उत्साहित ध्वनि आई! 
“पापा जी प्रणाम!” 
“सुखी रहो बेटा!” 
“घर आ गए हो न?”
“नहीं पापा जी! रानी को बेडरेस्ट की जरूरत है.. पिछले हफ्ते इसके मम्मी के पास लेकर आया हूँ.. डीलीवरी  तक रानी यहीं रहेगी!” और मैं भी.. घर आता जाता रहता हूँ..आप भईया के पास हैं तो मुझे आपकी चिंता नहीं है ..बच्चों के साथ अच्छा टाईम जाता होगा आपका..?”
“हाँ बेटा!”  बहू का ख्याल रखना ..मेरी फिक्र न 
करना!” 
बुझे मन से पापा जी बोल पड़े! 
” पापा हमने एप्वाइंट ले ली है आज.. कल फिर से आपको दिखा देता हूँ.. एक महीने की दवा भी ले लीजिएगा ताकि घर जाकर कोई हेल्थ इशू न हो आपको!”
अमन ने अपनी बात पूरी की! 
”  अब घर नहीं जाना है बेटा .. अभिनव अपनी पत्नी के साथ अपने ससुराल में है.. मैं अकेले कहाँ रहूंगा..?”
ओके! डोन्ट वरी पापा.. इफ यू डोंट माईंड.. आपको नीचे के कमरे में सीफ्ट कर देता हूँ वहाँ से आप भ्रमण भी कर लेंगे! अमन ने अपना विचार ब्यक्त किया! 
“हाँ बेटा! ये सही रहेगा! पापा जी ने अपनी सहमति प्रदान की!
अच्छा बेटा! रक्षाबंधन नजदीक है.. मैं  प्रति वर्ष अर्चना के लिए  गिफ्ट खरीदता हूँ.. तुम कभी मुझे मार्केट ले चलो!
पापा जी अपनी बात बोल गऐ और अनुकूल उत्तर की प्रतीक्षा करने लगे! 
” मैं खरीद लूंगा पापा.. मे..बी..नीलू ने आर्डर भी किया होगा.!” अमन की नजरें टेलीविजन पर टीकी थी! 
” बेटा! तुम सभी लेकर जाते हो न ..तो भी उसे मेरी पसंद की साड़ी ही चाहिए होती है.. बचपना नहीं गया है
उसका!” पुनः पापा जी के शब्दों में बेटी के लिए वात्सल्य उमड़ पड़ा! 
” वो भी समझ जाएगी पापा.. कबतक बच्ची बनी रहेगी!” अमन ने कहा और अपने कमरे में चला गया! 
सीढ़ी के बगल में एक हाल नुमा कमरा था जिसमें पापा जी को सीफ्ट किया गया! 
वहाँ भी सारी सुविधाएं मौजूद थीं! 
अब पापा जी सुबह अपनी छड़ी संभालते और टहलने निकल जाते! पापा जी से मिलने आस-पास के लोग भी आने लगे जिससे पापा जी का मन लगने लगा..स्वास्थ्य भी ठीक हो गया! किन्तु अभी पापा जी को वृद्धावस्था की कड़वी सच्चाई से दो चार होना बाकी था.! 
” रुही..! पूजन सामग्री नीचे ले कर आओ! पापा जी ने रुही को आवाज दी!”
रुही पूजा की थाली लाकर पापा जी के कमरे में रख दी! 
” आसनी और आचमनी भी लाना बेटा.!” 
. पापा जी पुनः आवाज लगाए! 
पापा जी आसनी बिछा कर बैठ गए! 
अब चंदन लगाना था..! 
” राहूल चंदन लाना बेटा!”
” पापा जी एक ही बार बोल दीजिए क्या- क्या चाहिए आपको..कहीं  सीढ़ी क्रास करते हुए बच्चे गिर गए तो लेने के देने पड़ जाएंगे!?” अमन चंदन की डिब्बी रखते हुए बोला! 
” अब कुछ नहीं चाहिए बेटा!” 
पापा जी ने कहा और अपनी पूजा में लग गए! 
पापा जी को सुबह शाम पूजा पाठ करना अनिवार्य था! बहू-बेटे को यह काम अतिरिक्त लगता था! 
” पापा जी ये पानी कहाँ से गिरा है..?”
नीलू ने पूछा! 
बहू.. वो हमने आचमनी  किया था न .. !”
वही फर्श पर फैला है! पापा जी ने नरम लहजे में कहा! 
” अब ये सब मत कीजिये पापा.. मैं धुल के रख देती हूँ..पूरा फर्श चिपचिपा हो गया है..कहीं आप स्लीप हो गए तो मैं  क्या- क्या कररुंगी…सिर्फ माला जपते रहिए!”
नीलू ने सभी पूजन पात्र को धूल कर रख दिया! 
पापा जी निरुत्तर थे! 
कमरे से बाहर निकलते ही नीलू का सामना अमन से हो गया.. जो सारी बातें सुन चुका था! 
” किस बात की नसीहत दे रही हो ..? तुम जल पात्र रख दिया करो ताकि जल नीचे नहीं गिरेगा.. पापा जी सदैव पूजा करते हैं और करते रहेंगे.. समय पर पूजा का प्रबंध हो जाना चाहिए!” अमन ने हिदायत दी और पापा जी के पास बैठ गया! 
नीलू पैर पटकते हुए उपर के कमरे में चली गई! 
” रुही – पुष्प ला कर रख दो बेटा..
और आसनी बिछा दो! “
राहुल और रुही ने पापा जी के लिए स्नान ध्यान का प्रबंध किया! 
पापा जी की छड़ी उनके साथ ही रहती जिसके सहारे वे टहलने जाते! 
कई बार सीढ़ी चढने उतरने में एक दिन छड़ी में रुही का पैर उलझ गया और नीलू ने फिर अमन को आड़े हाथों लिया!
” बच्चों के हाथ पैर टुट जाएंगे तुम्हारे वजह से.. तुम घर बैठो और टहल करो अपने पापा जी का.. मैं घर का काम करुंगी या तुम्हारा आर्डर मानूंगी.. जीवन भर पूजा करके अमर नहीं हो जाएंगे.. माईकल जैक्सन भी नहीं बचा पाया खुद को..!” नीलू ने बेटी का पैर सहलाते हुए अपनी पूरी भड़ास निकाल दी! 
पापा जी के कानों में  नीलू के कहे हर शब्द गुंजने  लगे …
एकाकी जीवन का जख्म भरने की बजाय अब बढता ही जा रहा था! 
पापा जी आंख बंद किए ईश्वर का स्मरण करने लगे! अमन की माँ.. क्यूँ अकेला छोड़ दिया तुमने मुझे.. अपना ही जीवन बोझ सा लग रहा है.. मैं अब नहीं रहूंगा अपनों के साथ.. कोई अजनबी जख्म भी देगा तो तकलीफ कम होगी.. यहाँ मैं अशांति की वजह बनता जा रहा हूँ..! ऐसी पीड़ा ..जो मैं किसी से बांट  भी नहीं सकता! 
पापा.. कबसे फोन बज रहा है आपका.. उठाते क्यूँ नहीं..?अमन की आवाज सुन पापा ने आंखे खोली! 
” बेटा.. बहुत बड़ी गलती है हमारी..!”पापा जी की करुण वेदना उभर आई! 
नीलू ने कुछ गलत नहीं कहा है पापा जी.. जो कुछ कहा है आपकी सेफ्टी के लिए कहा है!” अमन ने कहा! 
” ठीक है बेटा! अब मैं पूजा नहीं करुंगा!” भर्राई आवाज में पापा जी बोल पड़े! 
” शिक्षक वह है जो समाज को सही दिशा प्रदान 
करता है..! “
इन विचारों का अनुगमन करने वाले पापा जी आज स्वयं दिशाहीन हो गए थे! 
क्रमशः-
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