(जय भवानी जय शिवाजी) –
शाइस्ता खाँ के बाद शिवाजी का युद्ध अफजल खान से हुई- 
अफजल खान बीजापुर की आदिलशाही हुकूमत का बेहतरीन योद्धा था, जो की हर तरह की रणनीति अपनाने में माहिर था । वह अपनी जीत के लिए किसी हद तक जा सकता था और कुछ भी कर गुजरने के लिए हमेशा तैयार रहता था। बीजापुर और मराठों के बीच हुई लड़ाई में आदिलशाह की मां ने मराठों पर कब्जा करने के लिए अफजल खान को भेजा  । अफजल खान युद्ध से पहले छल से शिवाजी महाराज की हत्या करना चाहता था। उसने शिवाजी महाराज को प्रतापगढ़ के पास मिलने का संदेश भेजा। शिवाजी ने खान का यह आदेश स्वीकार किया और दोनों के बीच  मुलाकात का स्थान तय हुआ शिवाजी महाराज और अफजल खान की मुलाकात प्रतापगढ़ के पास शामियाने  में हुई थी अफजल खान जैसे शिवाजी महाराज से गले मिला उसने हाथ में बंधा चाकू शिवाजी के पीठ में घोपने की कोशिश की। शिवाजी ने सतर्कता बरती और अब्दुल खान का पेट 
बाघनख( बाघ के नाखून से बना हथियार) से चीर दिया। इसे देख अफजल खान के सिपाई ने शिवाजी महाराज पर हमला करने का प्रयास किया और इसका फायदा लेकर अफजल खान शामियाने से बाहर भागने में कामयाब हुआ। शिवाजी महाराज को पता था कि खान धोखा देने वाला है इसलिए वह पहले से ही हाथ में बाघनख पहने हुए थे। शामियाने से भागे अफजल खान को शिवाजी महाराज ने दौड़कर पकड़ा और युद्ध क्षेत्र में उसका वध किया। वध के बाद शिवाजी महाराज उसका सिर जीजाबाई के पास ले गए। मां ने शिवाजी से कहा कि अफजल खान से हमारी दुश्मनी थी लेकिन उसकी मौत के साथ ही अब दुश्मनी भी खत्म हो गई जिसके बाद शिवाजी ने अफजल खान के शव का पूरे सम्मान के साथ मुस्लिम परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया। शिवाजी महाराज ने अफजल खान की कब्र भी बनवाई जो आज भी प्रतापगढ़ में मौजूद है।
अफजल खान के मृत्यु के बाद शिवाजी ने पन्हाला के दुर्ग पर अधिकार कर लिया। फिर उसके बाद उन्होंने पवनगढ़ और वसंतगढ के दुर्गों पर अधिकार करने के साथ ही साथ उन्होंने रुस्तम खान के आक्रमण को विफल भी किया। इससे राजापुर तथा दावुल पर भी उनका कब्जा हो गया।
फिर उन्होंने एक अश्वरोही सेना का गठन कर अबाजी सोनदेर के नेतृत्व में कोंकण के विरुद्ध एक सेना भेजी। और फिर शिवाजी ने खुद जंजीरा पर आक्रमण किया और दक्षिण कोंकण पर अधिकार कर लिया और दमन के पुर्तगालियों से वार्षिक कर एकत्रित किया। साथ ही अबाजी सोनदेर ने 
कोंकण सहित नौ दुर्गों को जीत लिया। इसके अलावा शिवाजी ने भी ताला, मोस्माला और रायटी के दुर्ग को अपने अधीन कर लिया। 
बीजापुर का सुल्तान उनके हरकतों को जान चुका था। उनको रोकने के लिए उसने कर्नाटक से शाहजी राजे को अपने गिरफ्त में ले लिया। फिर बीजापुर के दो सरदारों के बीच बचाव करने के बाद शाहजी राजे को इस शर्त पर छोड़ा गया कि शाहजी शिवाजी पर लगाम कसेएंगे। फिर उसके बाद शिवाजी अगले चार साल के लिए खामोश हो गए और इस दौरान वह अपनी सेना को और मजबूत करते रहें और लडने के  नए तौर-तरीके सिखाते रहें। 
क्रमशः 
गौरी तिवारी
 भागलपुर बिहार
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