(नायिका)- मुझसे कभी मत दामन छुड़ाना।
               मुझसे वफ़ा तू अपनी निभाना।।
               मैंने किया है तुम्हें प्यार सच्चा।
               बनाया साथी तुम्हें मैंने अपना।।
      मुझसे कभी मत————-।।
(नायक)- निभाऊंगा मैं वादा तुमसे हमेशा।
               रखूंगा तुम्हें खुश मैं तो हमेशा।।
             बनाया है मैंने तुम्हें ख्वाब अपना।
             मुझे बेवफ़ा तू कभी मत समझना।।
        मुझसे कभी मत———–।।
(नायिका)- छोड़ा है तेरे लिए, बाबुल का घर मैंने।
              बचपन की सखियाँ, भाई-बहिन मैंने।।
             अब तो तू ही है, मेरा स्वामी साजन।
              मुझसे कभी तू कुछ मत छुपाना।।
         मुझसे कभी मत———।।
(नायक)- तू ही तो है मेरे सपनों की रानी।
             मेरी जिंदगी की मुहब्बत नूरानी।।
             माना तुमको खुशी मैंने अपनी।
             नहीं है पसंद तुमसे दूर रहना।।
        मुझसे कभी मत————।।
(साहित्यकार एवं शिक्षक-
 गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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