किसान बीज बोए रे जैसे
फसल लगन की, वो पाए वैसे
अपने फसलों को, लहलाते देख
खुश होए, रब मिल गया जैसे ।।
कायदा जग का, मिले “जैसे को तैसा”………………
मजदूर ने जब पसीना बहाया
खुशियों के संग ,अपना जीवन बिताया
न रह पाया, बड़ी हवेली तो क्या
हुनर से अपने ,अमीरों का घर तो बसाया 
कायदा जग का, मिले “जैसे को तैसा”……………..
माता-पिता दिये जैसे संस्कार
संतान के जीवन को मिले आकार
कर्तव्य समझ अपना,अंतिम क्षणों तक
मात-पिता का करे सेवासत्कार 
कायदा जग का ,मिले “जैसे को तैसा”………………..
इंसान करे दुनिया में कर्म जैसा
परिणाम मिलता ,उसको वैसा
अपने निस्वार्थ सेवा, सत्कार्यो से
प्राप्त करें , सच्चा सुख जीवन से
कायदा जग का ,मिले “जैसे को तैसा”…………………..
             
              मनीषा भुआर्य ठाकुर
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