लिए फिरते हैं हज़ार चेहरों पर चेहरे,
लगा रखे है मन पर बादलों के पहरे,
छुपा रखे हैं हंसी के पीछे
ग़म के न जाने कितने पहरे,
एक चेहरे पर छुपे है न जाने कितने नकली चेहरे
जिंदगी तो बस एक धुआँ सा है
कब फ़ना हो जाये, कुछ खबर नहीं,
यूँ असली चेहरों पर चढ़ा नकली चेहरे,
खुद की असलियत फ़ना ना कर,
आते है लाख ग़म और ख़ुशी के पल जिंदगी में,
यूँ बेवक़्त इनको दूजे के वास्ते ज़ाया ना कर
कभी आँसू, कभी ख़ुशी,
कभी गुस्सा कभी शिकायतों का दौर है,
यूँ अपने मन पर लगा कर नकली चेहरे,
ख्वाईशो को अपनी फ़ना ना कर
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर उत्तराखंड
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