माफ करना ,यह साथ अब तक का था।
छोड़कर यह जहान , एक दिन जाना था।।
खुश रहना सदा, हो रहे हैं विदा।
अलविदा, अलविदा, अलविदा, अलविदा।।
माफ करना————————-।।
यह तो रिवाज है संसार में।
 किसी से रिश्तें जोड़ना।।
अपने अजीज से बिछुड़ने पर।
आँखों से अश्कों का बहना।।
फिर भी होता नहीं खत्म रिश्ता तो।
बना रहता है वह रिश्ता सदा।।
अलविदा, अलविदा, अलविदा, अलविदा।।
माफ करना————————-।।
यह सुबह- शाम तो जिंदगी में।
अक्सर होती रहती है।।
कभी हंसता है दिल तो।
कभी साथ खिजा रहती है।।
निभा दिया हमने तो मरने तक।
तुमसे मोहब्बत का हर वादा।।
अलविदा, अलविदा, अलविदा, अलविदा।।
माफ करना————————।।
आखरी यह हमारी ख्वाहिश है।
इस चमन को आबाद तुम रखना।।
सबको खुश तुम सदा रखना।
यह चिराग सदा रोशन रखना।।
क्या गम अगर हम नहीं रहे।
फिर भी साथ है तुम्हारे खुदा।।
अलविदा, अलविदा, अलविदा, अलविदा।।
माफ करना————————-।।
साहित्यकार एवं शिक्षक-
गुरुदीन वर्मा ऊर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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