प्रभा प्रभात संध्या निशा दिन रात लिखुंगा भाष भाष्य भाव वर्तमान अतीत भविष्य कि बात लिंखुगा।।
जीवन का शुभ मंगल नैतिकता
मौलिकता मूल्य शब्द स्वर एक क्रांति लिखुंगा।।
नित्य निरंतर काल समय जीवन संग्राम कुरुक्षेत्र पथ विजय शत्र शात्र अविराम लिंखुगा।।
जीवन सार्थक सत्य संकल्प तप भगीरथ पराक्रम पुरुषार्थ शंखनाद लिखुंगा।।
निश्छल निर्विकार युग उत्क्रर्ष का पल पल पग भाग्य भारत का स्वाभिमान लिखुंगा।।
बचपन किशोर युवा चरित्र निर्माण
विकास अनुष्ठान संकल्प साध्य साधना अभिनंन्दन अभिमान लिखुंगा।।
कन्या बेटी नारी युग उत्थान भागीदार गौरव गरिमा युग पुरुष औरत औकात आवाहन शंखनाद लिखुंगा।।
सत्य सनातन संस्कृति सांस्कार भारत श्रेष्ठ नेक आराधना का जन आहुति अपरिहार्य लिखुंगा।।
जन जन की खुशहाली हरियाली
आहल्लादित मन स्वर शब्द ज्ञान विज्ञान साहित्य समाज सत्कार लिखुंगा।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।
