ऐसी जंग छिड़ी है देखो,यह बन्द होने का नाम नहीं।
24फरवरी से 14अप्रैल,आगया रुकने का नाम नहीं।
कितनी अबतक बर्बादी,देखे यूक्रेन-रूस की दुनिया।
जाने क्या-क्या होना बाकी,क्या-क्या देखेगी दुनिया।
शहर कभी आबाद रहा जो,कैसे इतना वीरान हुआ।
रौनक एवं सुंदरता थी जहाँ,कैसे इतना वीरान हुआ।
अस्पताल स्कूल थियेटर,सुपर मार्केट एवं यह माल।
कुछ भी नहीं बचा वहाँ,नागरिकों का भी बुरा हाल।
रूसी-यूक्रेनी दोनों सेना के,सैनिक बहुत हुए शहीद।
कितने निर्दोष नागरिक, इस महायुद्ध में हुए शहीद।
रूसी सैन्य साजो सामान,जले पड़े नष्ट हैं चारो ओर।
यूक्रेनी सैन्य साजो सामान,नष्ट हुए वे पड़े चारो ओर।
ब्लादीमीर पुतिन कैसे अड़े,जीते बिन न रुकने वाले।
ब्लादीमीर जेलेन्सकी भी,दिख रहे नहीं झुकने वाले।
दोनों के अहम के कारण,यह युद्ध नहीं रुकने वाला।
महाविनाश का ये कारण,लगता नहीं है थमने वाला।
कितनी लाशें कितनी कब्रें,अबसब दिखाई पड़ता है।
टीवी न्यूज चैनल पर सब,रोज सुनें दिखाई पड़ता है।
कितना कष्ट होता है देख,सब मन विचलित होता है।
शायद कुछ ऐसा ही हरेक,भीषण युद्ध में ही होता है।
अमेरिका संग नाटो देश भी,इस जंग में है घी डाला।
ये अपने वर्चस्व व्यापार की,खातिर मंसूबा है पाला।
रूस-अमेरिका महाशक्ति है,नहीं एक दूसरे से कम।
बाइडेन के प्रतिबंधों से भी,पुतिन का गुस्सा न कम।
डर बना है दुनिया में कहीं, तीसरा विश्व युद्ध ना हो।
परमाणु बम हथियारों को,चला कहीं ये युद्ध ना हो।
ऐसा कहीं हुआ अगर तो,ये धरती मानवता रोयेगी।
न जाने कितने लोग व,उनके परिजन सब खोएगी।
हे ईश्वर ! सद्बुद्धि दो सब को,ऐसा करना बंद करें।
शांति की राह को थामें दोनों, अब ये युद्ध बंद करें।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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