आत्महत्या करना किसी भी दर्द की दवा नहीं,
चोट कितनीभी गहरीहो येकोई भी शफ़ा नहीं।
ऐसा करके तो लोग इस दुनिया से चले जाते हैं,
बिना सोचे वह अपनों को कितनी सजा देते हैं।
याद रखते ना कहावत चन्दन विष व्यापत नहीं,
चाहे कितनें भी लपटे रहतेहों सदा उससे भुजंग।
ऐसी कोई बात कभी होनी ना चाहिये जीवन में,
परेशान हो परिस्थितियों से जिंदगी से होये तंग।
काँटों के बीच रहता है गुलाब मुस्कुराता है सदा,
यही सीख देताहै जियो जीने की जैसी हो अदा।
जीवन ये खुद ही क्षणभंगुर है इसे खुद न गवायें,
ऐसी नकोई सोच रखें नाही परिस्थितियां बनायें।
आत्महत्या करना येबहादुरी नहीं है बुजदिली है,
ऐसी कायरता करने केलिए जिंदगी ना मिली है।
डट कर करे मुकाबला और सब को करे परास्त,
संघर्ष करे व उम्मीदकी हरदम दिलमें रखे आश।
सुसाइट करना किसी भी समस्या का हल नहीं,
दुःख भले आजहै यहनहीं कि सुखद कल नहीं।
जीवन से न निराश हों कभी जीवन से न निराश,
मानव का तन दुबारा नहीं आयेगा ये अपने पास।
देखोतो सही रंग बिरंगी दुनियामें सबकुछहै भरा,
फिर क्यों तू परेशां है खुद जीवन छोड़ने पे अड़ा।
ये भी साथ सोचो कैसे जियेंगे अपने तुम्हारे बिना,
माँ-बाप बीबी बच्चों का क्याहोगा क्या तेरे बिना।
हिम्मत रखें मजबूत कभी ऐसा दुबारा न सोचना,
ईश्वर की दीहुई इस अनमोल जिंदगीसे न रूठना।
सपनों को मेल न सही पैसेंजर ट्रेन की रफ़्तार दें,
वो भी न मिल सके तो मंजिल पे पैदल सिधार दें।
लग जाये भले देर पर सपने जरूर होंगें सभी सच,
येहौसला है हिम्मतहै यही कर्म है सपने काहै सच।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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