इसलिए धरती को ,धरती माता कहते हैं।
क्योंकि इसके आँचल में ,हम जो पलते है।।
इसलिए धरती को——————।।
लेता है हर प्राणी जन्म, इसके गर्भ से।
करती है सबका पोषण, यह अपने अन्न से।।
मानती है हर प्राणी को, यह अपनी सन्तान।
करती है प्यार सबको , यह सच्चे मन से।।
इसलिए धरती को——————।।
रूप इस धरती के , एक नहीं, अनेक है।
कहीं पहाड़, कहीं समतल, कहीं रेगिस्तान है।।
कहीं है पठार – जंगल , कहीं बर्फ की है चोटियां।
नहीं जन्नत से कम , आबाद इनमें इंसान है।।
इसलिए धरती को——————।।
इसकी सुंदरता की रक्षा, हम सबका धर्म है।
इसको प्रदूषित होने से , बचाना है हमको।।
इसकी हरियाली- वनों को , हम नष्ट नहीं करें।
इसकी सुरक्षा से जीवनदान,मिलता है हमको।।
इसलिए धरती को——————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार – 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *