यद्यपि हर माँ के गोद की लाडली औ पापा की परी होती है चाँद सी सुंदर और घर भर की दुलारी, फ़िर भी अपने प्रियतम को तो होती है अतिशय प्यारी।जिसका जन्म-जन्मांतर कोई जोड़ीदार ही नहीं हो सकता। आइए देखते हैं इसी से संबंधित कुछ पंक्तियाँ और उनके मधुर-मिलन के साझीदार बनते हैं -:
आज के पल छिन कुछ कह रहे हैं। मधुर-मिलन की बातें यूँ दुहरा रहे हैं। 
सुखद है जीवन बता रहे हैं।मधुर-मिलन को फिर याद करके उन्हीं पलों को बुला रहे हैं।
आगोश में है मोहिनी ऐसा ही कुछ बता रहे हैं। 
आज के पल छिन कुछ कह रहे हैं मधुर-मिलन की बातें यूँ दुहरा रहे हैं। 
बहारों फूलों नव पल्लवों तुम संयोग श्रृंगार को सजाओ।
पांव महावर, हाँथों में मेहंदी 
चुनर औ साड़ी वो देखो ला कर दुल्हन को अपनी सजा रहे हैं।
चाँद से भी सुंदर परी बना रहे हैं। 
आज के पल छिन कुछ कह रहे हैं मधुर-मिलन की बातें यूँ दुहरा रहे हैं। 
रचयिता- सुषमा श्रीवास्तव, 
मौलिक कृति, सर्वाधिकार सुरक्षित, रुद्रपुर, उत्तराखंड।
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