जल की बूँद-बूँद को तरसें पशु पक्षी।
जल बिन जीते नहीं मानव पशु पक्षी।
पेड़ों-वनस्पतियों को आवश्यक जल।
जीव-जंतुओं को भी आवश्यक जल।
जल बिन मीन तड़प कर मर जाएगी।
जल बिन दुनिया कभी न रह पाएगी।
जल बिन मुर्छित हो जाता जग सारा।
आँखों के सामने छा जाता अंधियारा।
नल की टोंटी से चोंच लगा के न पाते।
पक्षी तड़प-तड़प कर प्यासे मर जाते।
इन्हें चाहिए घर की छत छांव में जल।
पेड़ों पे भी लटकायें पात्र में भर जल।
कहीं भी उड़ कर चुग लेते पक्षी दाना।
मानवता ये है कि इन्हें भी डालें दाना।
अच्छा लगता है जब चिड़िया आतीहै।
फुदक फुदकके कैसे ये चहचहाती है।
व्यर्थ न पानी फेंकें और बचाओ जल।
जल ही जीवन है जल है तो है कल।
ईश्वर और प्रकृति का वरदान ये जल।
भविष्य हेतु बचाएं व्यर्थ बहे ना जल।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
