जिंदगी को महकाने के लिये इत्र जरूरी है
जीवन की बगिया को महकाने इक मित्र जरूरी होता है।
जो गलत को गलत कहे,
हमें सच्ची राह दिखाये ।
जीवन में खुशियाँ भर दे,
दुख में हर गम बाँटे ।
कभी डांटे,कभी फटकारे,
कदम-कदम पर साथ चले।
मित्र-इत्र का कार्य करे,
जीवन को जीना सिखला दे।
मन मंदिर को महका दे ,
चेहरे की रौनक को चमका दे।
जब परम मित्र जीवन में,
इत्र की खुशबू भर जाती ।
मित्र इत्र सा महकाता जीवन,
हर पल हजारों खुशियों के ।
हर खुशबू को भर देते
सच्चा इक मित्र जरूरी है।
——अनिता शर्मा झाँसी
—–मौलिक रचना
