जी आज़ाद इस लोकतंत्र में, कौन हुआ है आज़ाद और आबाद ? और कौन हुआ है बर्बाद ? क्यों बढ़ती जा रही गरीबी वट की तरह ? क्यों कम नहीं हुई बेरोजगारों की कतार ?
आदमी के पसीने और डिप्लोमा- डिग्री की, क्यों घट रही है आज कीमत ? इस निजीकरण में कौन होगा आबाद ? कौन बनेगा शिक्षा का मालिक ? सिर्फ वो ही जिनके पास है खूब पैसा, और बाकी आबादी होगी उनकी गुलाम।
जिनका है अधिकार कारखानों पर, क्यों होंगे वो फकीर ? नारा लगाया जाता है, कि न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी देना, एक कानूनी अपराध है, संविधान में सबको जीने का, समान अधिकार है, लेकिन क्या हकीकत में इंसाफ है ? जी आज़ाद इस लोकतंत्र में।
शिक्षक एवं साहित्यकार गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी. आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
एक शिक्षक एवं साहित्यकार(तहसील एवं जिला- बारां, राजस्थान)
पोस्टेड स्कूल- राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नांदिया, तहसील- पिण्डवाड़ा, जिला- सिरोही(राजस्थान)
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