“ग़ौरी को उदास देखकर महादेव कहते हैं। आप आस पास के घरों में घूमनें जाया कीजिए। दिन भर घर में बैठी रहतीं हैं। इसलिए आपके मन में तरह-तरह के विचार आते रहते हैं। आप उदास भी रहतीं हैं। बाहर घूमने फिरने से दो चार स्त्रियों से आपस में बातचीत करने से आपका मन लगा रहेगा। गौरी कहती हैं ठीक है।
दूसरे दिन महादेव के घर से बाहर जाने के बाद, गौरी पड़ोस में जाती हैं। वो देखकर हैरान रह जाती हैं। हर कोई परेशान हैं। किसी के घर बरसों की मेहनत की कमाई चोरी हो जाती है। वो लोग अपनी किस्मत को कोस रहे होते हैं। गौरी को बहुत तकलीफ होती है और घर आकर महादेव से इस विषय में बात करती हैं।
महादेव हंसते हुए कहते हैं। आप चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा।
दूसरे दिन गौरी फिर पड़ोस में जाती है तो, एक स्त्री बैठ कर रो रही थी। उन्होंने पूछा आप क्यों रो रही हैं? उन्होंने कहा! एक कन्या रोज मेरे घर आया करती थी। बहुत ही सुंदर सुशील संस्कारी थी। परन्तु हमें नहीं पता था वो लड़की ढ़ोंग कर रही थी। हमारे बेटे को भगा कर ले गयी। इज्जत पर पानी फिर गया।काश ऐसा हो सकता जिससे हमें उसके लक्षण के बारे में पहले से पता चल जाता। मेरा लाल मेरे साथ होता। ग़ौरी को बहुत तकलीफ होती है। घर आकर महादेव से कहतीं हैं। आप तो सब कुछ कर सकते हैं। फिर आप ऐसा क्यों नहीं करते? आप चोर को कुछ अलग पहचान दे दो। छिनारी ( छिनाल ) को कुछ अलग पहचान दे दो। जिससे जब कोई ग़लत काम करे तो सबको पता चल जाए। महादेव पूछते हैं, क्या पहचान देना चाहिए? आप ही बताइए।? गौरी कहती हैं चोरनी को दुम और छिनारी को सींग। महादेव ने कहा ठीक है। अबसे ऐसा ही होगा। महादेव कहते हैं, आज मेरा मन हो रहा है कि चमड़े के जूते पहनूं। आप मोची से जूते बनवाकर ले आओ। महादेव खुद मोची बनकर बैठ जाते हैं। गौरी कहती हैं आप एक जोड़ी जूते बना दो, महादेव के लिए। वह पैसे मोची को दे देती हैं। मोची कहता है! आप कुछ देर बाद आओ मैं बनाकर रख देता हूं। गौरी मोची को पैसे देकर घर आतीं हैं ।महादेव से कहती हैं! कुछ देर बाद बुलाया है। घर आती है तो महादेव कहते हैं। नहीं, हमें अभी चाहिए। आप जाओ और अभी लेकर आओ।
गौरी वापस जाती है, मोची के पास। तो देखती हैं। जूते तैयार हैं परन्तु मोची वहां नहीं है ।बहुत देर तक मोची की राह देखते देखते शाम होने लगती है। गौरी को चिंता होने लगती है। अगर मैं समय से नहीं पहुंची तो महादेव क्रोधित हो जाएंगे। उन्होंने सोचा पैसे तो हमने दे ही दिए हैं। जूते तैयार हैं और मोची अभी तक आया नहीं ।शाम होने को आई है। तो, क्यों ना हम जूते लेकर जाएं। समय से नहीं जाऊंगी तो महादेव भी नाराज हो जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे। इसलिए बहुत प्रतीक्षा करने के बाद भी जब मोची नहीं आया, तो उन्होंने जूते ले लिये। वह अपने घर आ गयी ।
दरअसल मोची के रुप में महादेव ही जूते सिलने के लिए बैठे थे। वह गौरी की परीक्षा ले रहे थे । महादेव तो घर पर इंतजार कर रहे थे। तो फिर वहां कैसे आते हैं। गौरी जैसे ही घर आई। उन्होंने देखा उनके पीछे दुम लटक रही है। कितनी भी कोशिश करती अपनी साड़ी के पल्लू से ढ़कने की, दुम और बड़ी हो जाती है । गौरी को महादेव के सामने आने पर लज्जा महसूस होती है । वह घर से बाहर नहीं निकलती।
महादेव जोर से चिल्लाते हैं। आप कहां हो गौरी, आप जूते नहीं लायी क्या? गौरी घर के अंदर से ही जूते बाहर रख देती हैं।
गौरी कहती हैं।आप पहन कर जाओ। हमें कुछ काम है वही कर रहे हैं। परन्तु महादेव को तो सब पता है। महादेव घर के अंदर आते हैं और गौरी से कहते हैं। गौरी आप के पैर के पास क्या है? गौरी नजर नीचे करके कहती हैं। कुछ नहीं, कहां कुछ,? आप को देर हो रही है, आप जाइए।
महादेव कहते हैं आपने क्या चोरी की है गौरी? आप को नाड॰रि,(दुम ) लटक रही है। गौरी कहती हैं। हमसे गलती हो गयी ।हमने आपसे कहा आप को, चोर को पहचान देने के लिए। हमने चोरी नहीं की।
मोची को जूते का पैसे दे दिये थे। मोची बहुत देर प्रतिक्षा करने के बाद भी नहीं आया। तो मैं अपना सामान लेकर आ गयी। फिर मैं चोरनी कैसे हुईं?
आप अपना भाभट ( माया ) समेट लीजिए। हमें पता है ये आप का ही प्रपंच है। महादेव हंसते हुए कहते हैं! आप समझ गयी। अपनी चीज़ भी किसी को अगर दी है तो उसे बिना बताए लेना भी चोरी ही माना जाएगा।
वाहहहहहहह क्या कहने एक एक शब्द बेमिसाल क़माल क़माल क़माल 🌸🌸👌👌🌸🌸👌👌🌸🌸👌👌🌸🌸👌👌🌸🌸👌👌🌸🌸👌👌🌹🌹🌹💐💐💐🍁🍁🍁
Great work