“महादेव पर गौरी का संदेह”
“एक दिन गौरी महादेव से कहतीं हैं।मैं घर में पूरे-पूरे दिन अकेली बैठी रहती हूं।कितना अच्छा होता, यदि अपने घर में दो चार बच्चे होते। मुझे मां-मां कहकर मेरे आगे-पीछे घूमते। तो कोई किसी बात पर जिद लेकर बैठ जाती।कोई कुछ मांगता कोई कुछ। मैं सारा दिन बच्चों में लगी रहती समय कैसे व्यतीत हो जाता, पता ही नहीं चलता। महादेव कहते हैं। आप एक दिन अपनी ननद को तो सम्हाल नहीं पायी और आपको दो चार बच्चे चाहिएं। ननद तो अपने ससुराल चली गयी बच्चे कहां जाएंगे। गौरी कहतीं हैं। आप वह करिए जो हम चाहते हैं।बाकी सब हम पर छोड़ दीजिए। महादेव स्नान करने सरोवर पर चले जाते हैं। वह बहुत समय तक नहीं आते तो, गौरी को चिंता होने लगी। कहीं उसकी बात से तो महादेव नाराज़ तो नहीं हो गए?प्रायः ऐसा अक्सर होने लगा। महादेव जब भी सरोवर जाते सुबह से दोपहर को लौटते। अब गौरी को संदेह होने लगता है। महादेव जरूर किसी पर स्त्री के साथ रास रचा रहे होंगे। इसलिए विलम्ब हो जाता है।उन्हें सरोवर से आने में।दरअसल महादेव के लघुशंका से उत्पन्न (नागिन)विषहरा,को ये समझाने लगते कि अब उन्हें मां गौरी के साथ रहना है।तो कैसा व्यवहार करना चाहिए। ग़ौरी मां को ज्यादा परेशान नहीं करना है।जो मां कहे वही करना है। महादेव को समझाते बुझाते, और खेलते, समय कैसे व्यतीत हो जाता है, उन्हें पता नहीं चलता।गौरी को यहां संदेह होने लगा कि महादेव जरूर, किसी दूसरी स्त्री के साथ हंसी मजाक कर रहे होंगे।सरोवर पर तभी देर हो रही।एक दिन महादेव जब सरोवर स्नान करने गए तो गौरी उनके पीछे-पीछे ये देखने के लिए गयी कि महादेव सरोवर पर करते क्या हैं इतनी देर तक? गौरी सरोवर के तट पर पहुंची तो देखती हैं। महादेव के पूरे शरीर पर नागिन लिपट रही कोई उनके पीठ पर तो कोई बांहों पर लिपटी हुई थी तो कोई जंघा पर। महादेव उस सब नागिन के साथ खेल रहे हैं। गौरी क्रोधित हो जाती है।नागिन सब को महादेव के शरीर पर से नीचे फेंकती जाती है और अपने पांवों तले रौंदती जाती है। गाली देते हुए दुत्कारने लगती है गौरी कहती हैं! तो तुम्हारे साथ ही हंसी मज़ाक रासलीला करते करते महादेव को समय का पता नहीं चलता। महादेव को सुबह से दोपहर हो जाती है। तुम लोग हमारी सौतनें हो अपने रूप-रंग में मेरे स्वामी को मोहित कर उलझा रखा है।महादेव बताते हैं, ये हमारी संतान है। आप इस तरह का व्यवहार इनके साथ मत करो। गौरी को क्रोध में कुछ समझ नहीं आता। पांव तले मसलते हुए चिल्लाने लगती है। सभी नागिनों को ग़ौरी सरोवर में फेंकने लगती है।तभी महादेव भी क्रोधित हो जाते हैं और नागीन को सरोवर में छोड़ देते हैं। फिर कहते हैं आज से तुम लोगों का स्थान सरोवर ही है।क्रमशः
अम्बिका झा ✍️
