सुबह की 6 बजे की अलार्म से मुश्कान की आंखें खुली। और वो खुद को ज़मीं पर ऐसे पाकर थोड़ी अंजमजस मे पढ गयीं क्योकि ऐसा पहली बार हुआ था की बिना वजह इतना बेचैनी और चाँद से किसी और की बाते करना। कुछ देर वो सोचती रही कुछ समझ न आया तो अपना सर पर चपत लगायी और उठ कर बाथरूम मे चली गयीं।कुछ देर बाद वो अपनी भीगी भीगी बाल टावल से पोछते हुए बाहर आते हुए । बेड पर देखा आरती और राधिका अब भी किसी बच्ची की तरह सो रही थीं। उन्हें देख मुश्कान मुस्कुरा दी और सर मे टावल लपेटे रूम से किचन मे आगयी।किचन मे आज कोई नहीं था कुसुम भी अभी उठी नहीं थीं। तो मुश्कान कुछ बनाने मे गुम होगयी। कुछ देर बाद जल्दी मे कुछ किचन मे पहुंची। लेकिन कीचन मे पहले से मुश्कान को देख कर डोर पर ही रुक गयीं। और ध्यान से आटा गुंधती मुश्कान को देखने लगी। और मन ही मन ये सोचने लगी की जो लड़की को कयी आवाज़ देने के बाद नींद खुलती थीं। आज वो सबसे पहले उठ गयीं और किचन मे नाश्ता भी बना रही है। क्या होगया है इसे भगवान…
दी… आप कब आई और वहाँ क्यूँ खड़ी हो दी..? मुश्कान की इस सवाल पर कुसुम उसके पास गयीं और प्यार से उसे देखते हुए
कुसुम -देख रही हूँ की मेरी नटखट सी बहन अब सयानी होगयी लगता है। मुस्कुराते हुए
मुश्कान -होता है दी.. ये सब वक़्त के हाथो मे है। वो जो करवा दें।
कुसुम -क्या मतलब..? कैसी बाते कर रही हो मुश्कान?
मुश्कान -कुछ नहीं दी बस यूही।
कुसुम -अच्छा… वैसे क्या क्या प्लान है नास्ते मे बनाने की
मुश्कान -खीर ऑलमोस्ट बन चुकी है। आटा तो अभी पहाड़ बना है। सोच रही थीं की सबकी फेवरेट की सब्ज़ी बनाले आज…?
कुसुम -वाह…. अच्छी ख्याल है। चल मिलकर बनाते है।इस पर मुश्कान सिर्फ मुस्कुरा कर रह गयीं और दोनों मिलकर नास्ते बनाने मे लग गयीं।
  
सुमित का घर..
     अचानक से सुमित की नींद टूट गयीं और वो उठकर बैठ गया। यहाँ वहाँ देखा और खुद को सोफे पर पाकर बेड के तरफ ध्यान से देखते हुए खुद से ही कहाँ..
(सुमित ऐसा कब तक चलता रहेगा। आखिर कब तक दिन पे दिन फॅमिली के दिल मे कयी सवाल बढ़ते जारहे है। जल्दी ही कुछ करना होगा वरना अब ज़िन्दगी जिना भी मुश्किल होने वाली है )इतना कह कर वो वाशरूम मे चला गया। कुछ देर बाद बाहर आया तो हाथ मे चाय की ट्रे लिए मुश्कान को सामने पाया जिससे वो हैरान के साथ ख़ुश भी होगया। और प्यार से निहारती हुई मुश्कान की तरफ धीरे धीरे बढ़ने लगा। उसके पास जाकर कश्मकश मे खोये मुश्कान से पूछा
सुमित -देवी क्या आप सच मे हो मेरे सामने या कोई वहम है हमारे दिल के.?
मुश्कान -ज़ब आपके दिल मे इस वक़्त वहम है तो.. हाँ मान लीजिएँ हम एक वहम ही है।हम भी समझ लेगे की हम आपके लिए सिर्फ एक वहम ही है।सुमित मुश्कान के होंठ पर एक उँगुली रखते हुए
सुमित -चुप.. बिलकुल चुप.. Ok.. आप हमारे लिए कभी वहम भी होंगी ये सोच भी कैसे लिया देवी। हर सांस मे बसी हो आप हमारे। ज़िन्दगी हो आप हमारी जान…। मुश्कान सुमित के बिलकुल करीब जाकर.
मुश्कान -ठीक है जी नहीं सोचते। तो आप भी मान लीजिएँ आपकी जान आपके सामने है। और ये लीजिए आपकी चाय आज आपने हाथो से बनायीं हूँ..। इतना बोलकर वो चाय का कप सुमित के तरफ बढ़ाये। सुमित भी प्यार से मुश्कान को निहारते हुए अपना हाथ आगे किया कप लेने के लिए लेकिन… फिर हैरान होगया क्योकि उसके सामने तो क्या पुरे रूम मे कोई नहीं था सिवाय उसके।तो वो टावल को एक तरफ रखते हुए बेड पर बैठ गया और अपनी बाल मे हाथ घुमाते हुए..
  क्या होरहा है यार मेरे साथ 🙆‍♂️ये क्या था देवी..? क्या समझू इसे जो अभी अभी गुज़रा मेरे आँखों के सामने से। फिर मुस्कुराते हुए… क्या सच मे आज देवी ने अपने हाथ से चाय बनायीं होंगी…?
शीतल -क्या….
कुसुम -हाँ माँ आज मुश्कान ने चाय बनायीं है। और चाय ही नहीं नास्ते मे भी सब उसने ही बनाया है मै तो बस कुछ हेल्प ही की है आज। मुश्कान मोहित को चाय देते हुए
मुश्कान -कुछ नहीं माँ दी ने बहुत मदत की हमारी। तभी सब मुमकिन होपाया हमसे।
मोहित -क्या बात है माँ। शादी कुसुम दी की होनेको है और खाना बनाने का शौक मुश्कान को होरही है।
कुसुम -वो तो होगा ही भाई। क्योकि मेरे जाने के बाद इसे ही तो सब संभालना है। क्यूँ माँ..?
शीतल -हाँ बिलकुल बेटा। यकीं नहीं होता कभी कभी की मेरी छोटी छोटी चिड़िया कब बड़ी होगयी। और इतना जल्दी इन्हे बिदा भी करना होगा। 😥कुसुम, शालिनी और मुश्कान अपनी माँ को उदास देख कर उनका भी आंखें नम होगए।और तीनो आकर शीतल से लिपट गयीं। और
कुसुम -मत कीजिये न माँ बिदा हमें।
मुश्कान -हाँ माँ हमें कहीं नहीं जाना आपको छोड़ कर अपनी फॅमिली को छोड़ कर।
शालिनी -हाँ मम्मी क्यूँ बिदा करना जरुरी होता है बेटियों को ही अपने घर से क्यूँ..?शीतल तीनो को और कसके पकड़ते हुए
शीतल -यही रीत है बेटा इस संसार की। हम भी कहिसे बिदा होकर आए है। आप सबको भी कहीं जाना होगा बेटी। मोहित और रोहन एक दूसरे की तरफ देखे और आपस मे कुछ इशारे किये फिर उठ कर तीनो बहनो को शीतल से दूर करते हुए
मोहित -अरे अरे ये क्या छोड़ो एक दूसरे को। क्या माँ आप भी अभी थोड़ी न जारही है ये इस घर से। घुटनो के बल बैठ और शीतल की हाथ अपने हाथ मे लेते हुए। माँ.. आज हम आपसे वादा करते है की आपकी बेटियाँ कहीं भी जाए बिदा होकर लेकिन इस घर से जुदा कभी नहीं होंगी। जिस तरह अभी पूरा हक़ है इन्हे हम सब पर या हर चीज़ पर वैसे ही हमेशा इनका हक़ यूही रहेगा। रोहन भी दोनों के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए
रोहन -बिलकुल माँ ये कभी मत सोचियेगा की आपकी बेटियाँ कभी एकेले या कमजोर पड़ेगी। ये हमारे लिए बहन ही नहीं भाई की तरह है। हर मोड़ पर हम एक दूसरे की साथ रहेगे। दोनो भाईयो की बात सुनकर तीनो बहने मुश्कुराते हुए प्यार से उन्हें देख रही थीं तभी कुछ मोहित की फ़ोन बजा जिससे सबकी ध्यान उस तरफ चली गयीं। मोहित शीतल के पास से उठ कर अपना फ़ोन देखा तो स्क्रीन पर आकाश जी शो होरहा था। वो मुस्कुराते हुए सबकी तरफ देखा और कॉल रिसीव कर लिया।
मोहित -hello..!गुडमॉर्निंग आकाश जी 
आकाश -hi.. गुडमॉर्निंग जी..।कैसे हो आप सब..?
मोहित -हाँ जी हम सब ठीक है आप अपना सुनाइए।
आकाश -जी यहाँ भी सब ठीक है। लीजिए माँ बात करना चाहती है।
मोहित -हाँ जी क्यूँ नहीं…
आकाश की माँ -hello मोहित बेटा।
मोहित -नमस्ते आंटी जी 🙏
आकाश की माँ -नमस्ते बेटा जी। अभी आप कहाँ हो..?
मोहित -हम घर पर ही है। बोलिये..
आकाश की माँ -क्या शीतल जी से हम बात कर सकते है?
मोहित -बिलकुल आंटी जी। लीजिए बात कर लोजिये हम सब साथ ही है।इतना कह कर मोहित शीतल को फ़ोन देदिया। और सबकी इशारे पाकर स्पीकर ऑन कर दिया और सब ध्यान से सुनने लगे।
शीतल -hello..! शुभप्रभात बहन जी..
आकाश की माँ -जी शुभप्रभात। कैसी हो आप..?
शीतल -जी हम बिलकुल ठीक है। अपना सुनाइए..
आकाश की माँ -हम अपना क्या सुनाये बहन…
शीतल -क्यूँ क्या हुआ..? सब ठीक है न..?
आकाश की माँ -हाँ फिलहाल ठीक है जी लेकिन पूरा ठीक तब होगा न ज़ब हमारी कुसुम हमारी घर की बहू बनकर आजायेगी।
शीतल -हाँ जी अच्छा….। फिर बात को समझते हुए
तो.. क्या….
आकाश की माँ -हाँ जी… हमें कुसुम ही चाहिए अपने आकाश के लिए। उनकी बात सून कर सब ख़ुश होगए वही कुसुम शरमाते हुए मुश्कान के पीछे से ही हग कर लिया। जिसे देख शालिनी भी उसे गले लगा लिया।आकाश की माँ कोई जवाब न पाकर 2.3 बार hello बोल दिया। तो शीतल अपनी आँसू पोछते हुए
शीतल -हाँ जी बोलिये हम सून रहे है।
आकाश की माँ -लेकिन अब बोलना आप लोग को है न। हमने तो अपनी बात रख दी। कहीं कोई एतराज… तो नहीं..
शीतल -अरे नहीं नहीं बहन…। कोई इतराज नहीं है हमें। ये तो हमारी बेटी की खुसनसीबी है की आपके घर की बहू बने।
आकाश की माँ -जी हमारी भी खुशनसीबी है की आपकी परवरिश हमारे आँचल मे आरही है। माफ़ कीजियेगा हमने देर कर दी बताने मे और शायद कुछ जल्दबाजी भी कर दी है।
शीतल -हम कुछ समझें नहीं।
आकाश की माँ -वो क्या है की कल रात को ही आपको ये खुसखबरी देना चाहते थे लेकिन देर रात होने के कारण कॉल नहीं की। और आज सुबह हमने पंडित जी से भी बात कर ली इस बारे मे तो…
शीतल -अरे ये तो बहुत अच्छी बात है जी। बताइये क्या कहाँ पंडित जी ने।
आकाश की माँ -यही की इसी एक महीने की अंदर कुसुम की डोली हमारे आँगन मे आएगी।
शीतल -मतलब…?
आकाश की माँ -मतलब की इसी महीने की मुहूर्त सबसे अच्छा बताये है।बोलिये आप का क्या कहना है।शीतल सबकी तरफ देखते हुए सबसे इशारो मे ही पूछा तो मुश्कान और शालिनी के चहरे से पता चल रहा था की वो ख़ुश है। मोहित और रोहन भी हाँ मे सर हिला दिया। कुसुम के तरफ देखी तो वो पलकें झुका कर मुस्कुराते हुए मुश्कान के पीछे छुप गयीं। जिससे शीतल मुस्कुराते हुए
शीतल -बहुत खुशी की बात है जी। हमें कोई ऐतराज़ नहीं है।
आकाश की माँ -तो तैयारियां शुरू कीजिये समधन जी आने वाले 12 तारिक को सगाई का महूर्त है और 15 को शादी..।
शीतल -क्या…?
आकाश की माँ -हाँ जी। मानते है टाइम कम है लेकिन इसके आगे का मुहूर्त अच्छा नहीं है तो…
शीतल -कोई बात नहीं जी। सब ठीक होजायेगा।
आकाश की माँ -तो आजसे ही तैयारि करना शुरू कर दीजिये आरहे है हम सात दिन बाद सगाई कराने।
शीतल -जी हमें भी इंतजार है 🤗
आकाश की माँ -तो ठीक है समधन जी  हम रखते है। और जल्द ही मिलते है।
शीतल -जी जरूर। बोल कर कॉल कट कर दिया। फ़ोन रखते ही मुश्कान और शालिनी एक साथ जोरो से चीख पड़ी। जिससे हॉल मे सब डरे तो डरे आरती और राधिका भी एक दूसरे से टकरा कर गिर पड़ी जो अभी अभी मुश्कान के रूम से हॉल मे आरही थीं। उन्हें देख मुश्कान ने सर पिट लिया 🤦‍♀️और जाकर दोनो को हाथ देते हुए
मुश्कान -क्या yr तुम दोनों छोटी बच्ची हो क्या। जो सूखे फर्श पर ही गिर रही हो। आरती और राधिका उसकी हाथ पकड़ के उठते हुए
राधिका -अच्छा जी। हम तो बच्ची ही है लेकिन तुझे क्या जरूरत थीं इतनी जोड़ से चिल्लाने की।
आरती -और नहीं तो क्या। ऐसा लगा जैसे  कोई भुत देख लिया तुमने।
शालिनी -अरे नहीं दी.. हम भुत देख कर नहीं चीखते क्योकि भुत खुद हमें देख कर भाग जाते है। लेकिन आज बात कुछ अलग थीं। रोहन अपने कान से हाथ हटाते हुए
रोहन -लेकिन चिल्लाई क्यूँ..? 🙍‍♂️ऐसा क्या हुआ..
मुश्कान -भाई ये तू पूछ रहा है..?रोहन कुछ सोचते हुए
रोहन -ओह हाँ समझ गया। लेकिन दी मैंने ये चांस मिस कर दिया।
शालिनी -कोई बात नहीं। हमने तेरे लिए भी पूरा कर दी है। देख अभी तक मोहित भईया सदमे है 😂😂
मोहित -कभी नहीं सुधरेगी ये दोनों 🙆‍♂️राधिका और आरती एक साथ। (हुआ क्या कोई बताएगा हमें भी )
शीतल -हुआ नहीं है अभी।सात दिन बाद सगाई है हमारी कुसुम की 😊🤗। इतना सुनना था की मुश्कान को हग करते हुए दोनों ही ख़ुशी से चीख पड़ी। मोहित चिढ़ते हुए
मोहित -हद है आप दोनों भी… मुश्कान की तरह ही होगयी..?
आरती -नहीं भईया हम इसके तरह नहीं हम सब एक जैसे है। वैसे इतनी खुशी की बात है। और सुबह सुबह इतनी बड़ी खुसखबरी मिला इस बात पर तो बनता है पागलपन.. 😁😁
शीतल -हाँ बिलकुल और आकर सब नाश्ता कर लो। आरती और राधिका के तरफ देखते हुए। आज का नाश्ता मुश्कान ने बनायीं है। राधिका और आरती उसे हैरानी सर देखते हुए ohh really… 😱😱
मुश्कान -हाँ जी चलो सब खाकर बताओ कैसा बना है। फिर हमें आश्रम भी जाना है न। राधिका अपनी हाथ की घड़ी देखते हुए
राधिका -ओह तेरी… 🙆‍♀️आठ बजने को है। मुश्कान जल्दी…
शीतल -हाँ जी जल्दी लेकिन सब ठीकसे नाश्ता कर लो और टिफन भी ले लेना। कुसुम रसोई से आते हुए
कुसुम -तुम तीनो नाश्ता करो मैंने टिफन तैयार कर दी है। सब मिलकर नाश्ता किया और नाश्ते की तारीफ़ भी। कुछ देर बाद ये तीनो सहेलियां एंजियो के निकल गयीं।आज तीनो ने लग भग same पिंक कलर की सूट पहनी हुई थीं। सिर्फ थोड़ी फर्क था कलर मे।लेकिन तीनो ही बहुत जँच रही थीं। रोज़ की तरह बस स्टॉप पर खड़ी हंसी मज़ाक आपस मे चालू था बेपरवाह सी।
          कुछ दूर पर खड़े एक कार मे से सुमित हैरान सा सोच मे पढ गया था। वो खुद से ही बोला (ये कैसे होसकता है सुमित…? Same सूट, क्या सच मे आज मेरे पास आई थीं। या ईश्वर की कोई इशारा है?)तभी उसके फ़ोन की नोटिफिकेशन आया। देखा तो लोकेशन था। तब तक मुश्कान के बस भी आचुका था। वो तीनो बस पर चढ़ गयीं। और सुमित ऑफिस से मिले लोकेशन साइड की तरफ कार दौड़ा दी।।
क्रमशः : आगे पढ़ते है कैसे मिलते सुमुशकान एक दूसरे से और कैसे सुमित अपनी देवी से अपना दिल का हाल बयां करता है….।
नैना… ✍️✍️✍️✍️
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