जीवन में आती जाती
सांसों का हिसाब क्या
सांसों के घट जाने से
जीवन संकट में आ जाता
रुपए पैसे धन दौलत का
हिसाब हो जाता
प्यार और नफरत का
हिसाब क्या
प्यार के जुड़ने से
जीवन में बहारें छा जाती
जब घट जाता प्यार तो
जीवन नर्क बन जाता
चाहे दौलत का बिस्तर हो
गर मन को सुख चैन नहीं
ऐसा बिस्तर किस काम का
जिस पर नींद नही आती
सारा दिन मेहनत कर
रात को पैर पसार सोता
उसके जीवन में धन का
गुणा भाग नही होता है
जीवन में सुख दुख का
आना जाना बना रहता
दोनो गर नही आते तो
महत्व समझ कैसे आता
सुख दुख कर्मो का हिसाब है
कर्मनुसार फल मिलता
बबूल के पेड़ पर
आम का फल नही आता
जीवन रूपी बैंक में जब
प्यार का कम होता बैलेंस
चेक खुशी के बाउंस होते
खुशियां जीवन से दूर भागती।
हर माता पिता संतान से
निस्वार्थ भाव से प्रेम करते
उनके अनमोल प्रेम का
कोई हिसाब होता है क्या?


