रानी बहू.. सभी काम निपटा कर आना मेरे कमरे में..
आज बड़ा बाक्स खोलना है.! माँ जी के शब्दों के साथ ही चेहरे पर प्रसन्नता के भाव थे!”
“क्या हुआ माँ जी.? अर्चना आ रही है क्या.?” रानी ने पुनः प्रश्न किया!
” सबको आना है बेटा..तुम सहयोग करोगी तो मैं साड़ी और धोतियाँ गिन कर रख लूंगी! जो कम पड़ेगा वो मंगाया जाएगा.. अब बड़ा बाक्स तो मुझसे खुलेगा नहीं.. कमर सीधी नहीं हो रही..!”
” कोई फंक्शन होगा माँ जी.?.मुझे तो किसी ने कुछ नहीं बताया अब तक.?” रानी आश्चर्यचकित हो रही थी!
“अरे हां रानी! मैं तो तुमसे बताना ही भूल गया.. बड़े भईया का फोन आया था.. अगले वर्ष राहुल का उपनयन.. और साथ में भागवत् कथा का आयोजन भी होगा.!” अभिनव एक सांस में पूरी बात बोल गया!
“वाह! ये तो बहुत अच्छी बात है.. तभी तो माँ जी इतनी एक्साइटेड है बाक्स खोलने के लिए..!” रानी बोल पडी़!
“और कमर का दर्द भी छू हो गया है इनका.. पोते का नाम सुनते ही डबल एनर्जी आ जाती है!”
पापा जी ने बहू बेटे का समर्थन किया!
सभी लोग हंसते हुए अपना कार्य संपन्न करने में लग गए!
” रानी ! पापा जी को भोजन करा देना.. मुझे आज एक मित्र से मिलने जाना है..!”
तभी पापा जी की बात सुन कर वहीं रुक गया!
” ठीक है बेटा! जैसी तुम्हारी इच्छा..!”
फोन पर बात करते हुए पापा कमरे में प्रवेश किए!
“क्या हुआ पापा.?” अभिनव ने उत्सुकता वश पूछा!
“तुम्हारी माँ कहाँ है..?” पापा जी गंभीर मुद्रा में बोले!
” हाँ! अमन के पापा.. माँ जी हाथ में एक साड़ी का पैकेट लिए पापा के पास आ गईं!”
“ये जयपूरी चुंदरी है .. अर्चना को बहुत पसंद है उसके लिए रख देती हूँ..!”
माँ जी मुझे भी ऐसा ही चाहिए.. रानी बहू बोल पड़ी.. ओ.. तो..तुम ही रख लो बहू उसके लिए खरीदी जाएगी!”
सास बहू अपने बात में मशगूल थीं!
“अच्छा!साड़ी की काउंटींग हो गई हो तो पापा की बात भी सुनिए अब!” अभिनव ने माँ से मुखातिब हो कर कहा!
“हाँ.. कुछ कह रहे थे आप.?”
माँ ने सोफे पर बैठते हुए कहा! अभिनव और रानी भी वहीं पास में बैठ गए!
“अमन का फोन आया था.. अभी वो घर नहीं आना चाहता है…!” पापा जी संक्षिप्त शब्दों में कह गए!
“उपनयन के लिए आएगा न.. आपने मुहूर्त देखा अभी तक..?”
माँ ने पुनः प्रश्न किया!
“अभी दो वर्ष तक उसने कोई भी फंक्शन करने के लिए मना किया है.!”
“और आप मान गए..?
कितने दिन हो गए पोते को कहानीयां सुनाए हुए.. अर्चना भी आने को तैयार है.. सभी बच्चों को देखने की प्रबल आकांक्षा हो रही है.. अब हमारी
सांसो का क्या भरोसा.. कब थम जाए.. माँ को अंतिम समय का आभास होने लगा था.. !”
कहते-कहते माँ जी उदास हो गई!
” हमें कमजोर मत करो अमन की माँ.. आज से पांच दिन का समय है हमारे पास..गणेशोत्सव कराते हैं उसमें सभी को आमंत्रित कर देंगे.!”
पापा जी की बात सुन कर सभी खुश हो गए.!
“हाँ माँ जी.. कितना मजा आएगा..आपके सभी बच्चे आपके साथ होंगे .!”
बहू रानी ने अपनी प्रसन्नता जाहिर कर दी!
गणेशोत्सव की तैयारी जोरों-शोरों से होने लगी!
सभी कुटुम्बों को आमंत्रित किया गया.. धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए किसी ने कोई आपत्ति नहीं की.. तीनों बहू-बेटे और पौत्र- पौत्रियों से घर में रौनक सी आ गईं थी! अर्चना अपने पति और बच्चों के साथ आ गईं! सुरभी और सौरभ भी मिलने आ गए!
भब्य पूजन का आयोजन किया गया.. सभी आगंतुक मेहमानों और मीडिया के समक्ष अगले वर्ष शिव मंदिर निर्माण की घोषणा भी की गई…घर-परिवार में खुशी और उत्साह का माहौल था..
पर नियति की इच्छा कुछ और हीं थी…ये माँ जी के जीवन की अंतिम खुशी थी.. सभी को आशीर्वाद देने के बाद.. सभी सगे संबंधियों से मिलने के बाद ब्रम्ह मुहूर्त में माँ के प्राण पखेरू हो गए!
कल की मुस्कराहट आज आंसुओं में परिवर्तित हो गई थी.. चारों तरफ माँ जी के सदगुणों के चर्चे हो रहे थे.. भीगी आँखों से सभी ने माँ को अंतिम विदाई दी..
नियत तिथि पर ब्रम्हभोज संपन्न हुआ!
धीरे- धीरे सभी मेहमान विदा हो गए.. अर्चना पापा के गले लग कर फूट-फूट कर रो पड़ी,.. पापा और बेटी का रुदन देख कर सभी की आंखे बरस रही थी.. कोई किसी को आश्वासन देने वाला नहीं था.. !
खुद को संयत करते हुए अमन भैया ने अर्चना को ढांढस बंधाया..” मैं हूँ न बेटा! माँ ने सत्कर्म किया था.. हम सभी को अपना आशीर्वाद दे कर गईं हैं..मैं कभी तुम्हें माँ की कमी नहीं होने दूंगा.. !”
“हाँ बेटा! तीन भाभियों के बीच तुम्ही तो एक हो .. हमसब सदैव तुम्हारे साथ हैं..!” नीलू भाभी ने कहा!
“अपना ख्याल रखना बेटा! रोने से अब माँ नहीं आएगी..
पापा ने भर्राए गले से कहा और खुद आंसू बहाने लगे..!”
सबसे मिलने के बाद अर्चना अपने पति के साथ अपने ससुराल चली गई!
” पापा जी अब आप धैर्य धारण कीजिए…माँ और पापा सब कुछ आप ही हैं…हमसब कबतक रहेंगे आपके पास…? आखिर बच्चों की स्टडी से कोई कम्प्रोमाइज़ नहीं किया जा सकता है.. .हमें जाना ही होगा.. उमा बहू ने इतना कहकर अपने कर्तव्य का इतिश्री किया और जाने की तैयारी में लग गई..! अगली सुबह दोनों बेटे अपने पत्नी व बच्चों के साथ अपने निवास स्थान पर चले गए..!”
अभिनव और रानी बहू पापा जी का पूरा ख्याल रखते थे..! हर सुख सुविधा प्राप्त थी..किंतु अकेलापन अब जीवन को खोखला कर रहा था.. मानसिक संताप सहते हुए शरीर भी अब रुग्ण होने लगा..मां को देवलोकगमन किए एक वर्ष हो गए थे.. धीरे-धीरे बहू बेटे का आना जाना भी कम होता गया..अब जीवन का एक ही लक्ष्य था शिव मंदिर का निर्माण करना..!
अर्चना को पापा जी की सदैव चिंता लगी रहती थी. .
समयानुसार वह पापा जी का कुशलक्षेम पुछती रहती..
दो चार दिन के लिए मिलने भी आ जाती थी.. पर माँ की कमी का आभास कर के वह रुक नहीं पाती थी..!
” बेटा! सोच रहा हूँ कि मंदिर निर्माण कार्य अतिशीघ्र प्रारंभ कर दूं.!” पापा जी ने मन की बात अपनी बेटी को बताई!
“पापा..इतने पैसे अब बचे कहाँ हैं आपके पास..? पेंशन तो अभिनव भईया खर्च करते हैं.. किराएदारों से कितना मिला होगा आपको..?” अर्चना ने अपना संशय प्रकट किया!
“हाँ बेटा! ये राज सिर्फ तुम्हारी माँ ही जानती थी.. हमारे गाँव के एक मुस्लिम चाचा.थे…जिनकी करोड़ों की संपदा थी..
उन्होंने अपने जींदगी में कई निवेश किये थे.. जिससे वह मंदिर निर्माण कराना चाहते थे.. इस बात की भनक पड़ोसियों को लगी और वे लोग उनसे संपत्ति हड़पने का षडयंत्र करने लगे…उनके अपने बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया …वो नहीं चाहते थे कि कोई मुस्लिम मंदिर निर्माण कराए और पूजा हिन्दू लोग करें..! तब हमारे दादाजी गाँव के सरपंच थे..दादाजी जातिवाद के विरोधी थे..दादाजी ने उन्हें पूर्ण संरक्षण प्रदान किया और उन्होंने जीते जी अपना सारा निवेश दादा जी के नाम से फिक्स कर दिया..फिर हर पीढ़ी मंदिर बनवाने की तैयारी होती है और धन का विवाद हो जाता है.. इसलिए मैं शीघ्र ही इस कार्य का आरंभ करना चाहता हूँ..!”
क्रमशः-
