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क्या वजह है ए काले बादल तेरा यूँ छाने का
कहीं फिर कोई बेहाल है क्या नाम अपने दीवाने का
ऐसी कौन सी साज़िश कर रहा है वो आसमान जाने
जो बरस पढ़ा है बारिश नाम नहीं लेता अब रुकने का
कभी लगता है हमें ये बुँदे सनम का हाल सुना रही है
मचलती हवाएं उनके धड़कन का साज़ गुनगुना रहे है
कभी लगता है उस बहके बादलो मे राज़ छुपा है कोई
जो पिघल रहा है इस तरह, नाम नहीं लेता अब रुकने का
यूँही बेवजह नहीं तड़पते बिजलीया जरूर कोई बात है
बयां कर रहा है किसी बिछड़े दिलो की हाल हमें लगता है
आता हमें भी गर उस आसमानो की भाषा तो सून लेते हम
की क्या कह रहा है बादल, क्या वजह है इस तरह बरसने का
हम एकेले ही नहीं आज हर एक दिल परेशान लगता है
कोई मिलकर भी न मिले प्यार से तो कोई दूरियों मे रोता है
बड़ी अदा से बयां कर जाती है जो इश्क़ बुँदे तपती ज़मीं से
हर किसी को कहाँ आता है कुछ ऐसे मोहब्बत जताने का
जिनका मिलना लिखा है लकीरों मे उन्हें तो मिल जाना है
हमारा क्या है नैना शायरा है अल्फाज़ो मे मिल जाना है
जो तकदीर मे ही नहीं उसके लिए रोना है नादानी, लोग कहते है
पर वो इश्क़ ही क्या जो उम्मीद हो आसानी से मुक़्क़मल होजाने का…!!
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नैना…. ✍️✍️✍️
