पापा जी को अमन के बंगलू में रहते हुए एक महीने हो गए थे! राहुल और रुही  दादा जी का सामीप्य पाकर अति प्रसन्न थे! बहू- बेटे पूरा ख्याल रखते थे! प्रति दिन अर्चना फोन कर हालचाल लेती रहती!  इस बीच अभिनव और रानी कहीं बाहर  घुमने  चले गए ! अभिनव ने बताया था कि घर वापसी में दो महीने लग जाएंगे! 
अर्जुन और उमा एक दिन मिलने भी आ गए! 
“पापा जी आप फिर से दादा बनने वाले हैं..!”
उमा ने चहकते हुए कहा! 
अच्छा! तब तो मेरा बुढापा छू हो जाएगा! दादा बनने की भावी प्रसन्नता चेहरे पर जाहिर हो रही थी! 
” हाँ पापा जी! रानी से मिलकर आ रही हूँ मैं..! 
ट्रीटमेंट चल रहा है.. कल अभिनव ने अल्ट्रासाउंड भी करवाया था  सब कुछ नार्मल भी है!” 
इसी बीच पापा जी के घुटनों में दर्द होने लगा.. सुगर लेबल भी बढ गया था.. अमन ने डाक्टर को दिखाया तो डाक्टर ने पापा जी को मेडीसिन के साथ टहलने का परामर्श भी दे दिया! पापा जी घर पर थे तो अपने बगीचे में घुमते रहते थे! यहाँ सीढ़ी से उतरने की समस्या थी!  कहीं जाना होता तो अमन हाथ पकड़ कर सीढ़ी पार करा देता! 
” बेटा! तुम हमें सुबह नीचे उतार दिया करो.. मैं थोड़ा भ्रमण कर लूंगा! घर पर घुमता था तो ईतनी समस्या नहीं थी! यहाँ पड़े-पड़े सुगर भी बढ रहा है..!” पापा जी ने अमन से अपनी समस्या बताई!” 
“जी पापा! कल से लेकर चलूंगा!” अमन ने आश्वाशन दिया! 
सुबह पांच बजे पापा जी  अपनी छड़ी संभाले और अमन को आवाज देने लगे! 
” क्या हुआ.? इतनी सुबह  पापा क्यूँ बुलाने लगे.?” नीलू ने कहा! 
पापा कहीं भ्रमण करने जाएंगे! कहते हुए अमन कमरे से बाहर निकला! 
अमन पापा जी को बडे़ सावधानी से सीढ़ी से नीचे उतार देता और पापा जी भ्रमण कर आते.. पुनः दफ्तर जाने से पहले उन्हें उनके कमरे तक छोड़ भी आता!  
” अमन! पापा जी ने इन दिनों अपना पेंशन नहीं उठाया क्या?” नीलू ने याद दिलाया! 
“तुम्हें पेंशन की क्यूँ पड़ी है.? उनकी इच्छा जब उठाएं..!” अमन ने नीलू को समझाया! 
“तुम्हें भी तो लोन भरना है अभी घर का.. पापा जी का इलाज भी करवाते हो.. यदि मिल जाता तो कुछ तो राहत मिलती तुम्हें.. एक बार पूछ भी सकते हो.. तुम बड़े बेटे हो उनके!”
” अच्छा! देखता हूँ..!” 
नीलू ने पापा जी के पसंद का दही बड़ा बनाया और सभी लोग डाईनिंग टेबल पर बैठे!
“कैसा बना है पापा?” नीलू ने पूछा!
” बहुत स्वादिष्ट है बहू.. मैं सिर्फ यही खाउंगा!”
पापा जी खाते हुए बोल रहे थे! 
नीलू ने फिर से अमन को इशारा किया! अमन ने बात सुरु की! 
” पापा जी दो महीना होने को हैं.. आपने अपना पेंशन निकाला इस बार?” 
अमन ने पापा जी से पुछा! 
“नहीं बेटा! अब पेंशन इकट्ठा करके मंदिर का कार्य आरंभ करना है.. अब तक तो कमाना खाना बराबर होता गया है.. अब खुद की सद्गति के लिए भी कुछ करना है..!” 
कहते हुए पापा ने टीश्यू पेपर से हाथ साफ किया और छड़ी के सहारे अपने कमरे में चले गए! 
पापा की बात सुनकर नीलू को सांप सूंघ गया और अमन नि:शब्द हो गया! 
फिर अगली सुबह पापा ने आवाज दी..
“आया पापा जी..!”
.अमन की आवाज आई..पर अमन उठ कर नहीं आया..! 
किंतु नीलू की गरजती हुई आवाज पापा के कानों में पड़ गई..! 
” बारह बजे तक तो तुम आफिस का काम करते हो…सुबह सात बजे तक सोने की आदत है तुम्हारी,..और अब पांच बजे जग रहे हो..नींद भी पूरी नहीं हो रही अब..सेहत खराब होगी तो तुम्हारे परिवार को देखने वाला नहीं है कोई!” नीलू आवेश में बोले जा रही थी! 
अमन आज दफ्तर जाते वक्त पैर छुने भी नहीं आया! 
अब पापा जी सुबह किसी को नहीं बुलाते थे!
राहुल और रुही  पापा जी के लिए पूजन सामग्री ला देते और नीलू आसनी बिछा देती!जबतक बच्चे पास होते समय अच्छा बीतता था.. उसके बाद समय काटना पड़ता था! 
पहले पापा जी कभी अकेले चाय पीना भी पसंद नहीं करते थे.. ! कोई घर या बाहर का साथ अवश्य होता था..! 
अब पापा जी को लंच भी अकेले ही करना पड़ता था..! अमन प्रायः अपने बेडरूम में लंच करता! पापा जी के पास बैठना कोई जरुरी नहीं समझता था!
कभी बैठता भी था तो हाथ में रिमोट और नजरें टेलीविजन पर टीकी रहती.! .धीरे- धीरे पापा जी का मन अशांत रहने लगा! परन्तु किसी से कुछ कह भी नहीं पाते थे! 
” ये लंच कर लीजिएगा पापा!” 
नीलू ने थाली रखा और वहाँ से चली गई!
“भूख नहीं है बहू.. लेती जा.!” नीलू ने अनसुना किया और चली गई!
शाम को अमन पापा जी के कमरे में आया तो थाली पर नजर पड़ गई! 
” यहाँ थाली क्यूँ पड़ी है अभी तक?” पापा..आपने  कुछ खाया नहीं क्या? अमन ने थाली देखी और नीलू से पूछा! 
” नहीं बेटा! अब बैठे- बैठे गैस बन जाता है ..इसलिए भोजन नहीं किया मैंने .. मैं उतर नहीं पाऊंगा सीढ़ी से.. और टहले बिना स्वास्थ्य खराब हो रहा है प्रतिदिन!”
नीलू की प्रतिक्रिया से पहले ही
पापा जी संक्षिप्त में अपनी समस्या बताने लगे! 
“अब हर फैसीलिटी तो दी गई है आपको.. घर पे भी तो आप ऐसे ही रहते थे.. दवा भी अभी चल रही है आपकी.. इससे ज्यादा हमसब क्या कर सकते हैं..?” 
अमन ने अपनी सफाई पेश की! 
” हाँ बेटा! अगर तुम्हे फूर्सत  हो तो हमें घर छोड़ आओ.. अभिनव कहीं जा नहीं पाता है.. रानी बहू को इस हाल में अकेले छोड़ भी तो नहीं सकता..वहाँ मैं अपने बगीचे की छांव में थोड़ा भ्रमण भी कर लूंगा..अपने सहपाठी मित्रों से मिलता रहता हूँ तो बेटर फील होता है!” 
“ओके! मैं आपके जाने का प्रबंध कर देता हूँ.. आप अभिनव को बुला लीजिए.. मुझे अगले हफ्ते तक एक खास प्रोजेक्ट कम्पलीट करना है.. तीन बेटे हैं आपके.. जहाँ आपका मन लगे वहाँ रहिए.. मुझे कोई आपत्ति नहीं है..!”
क्रमशः-
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