आयुर्वेद प्राचीन काल से एक चिकित्सा पद्धति है।
एलोपैथिक जन्मी न थी तबसे
चिकित्सा पद्धति है।
ऋषियों मुनियों की खोज रही
ये आयुर्वेदिक दवाएं।
बड़ी कारगर दुष्प्रभाव रहित हैं
ये आयुर्वेदिक दवाएं।
शल्य चिकित्सा में भी कारगर
दोनों पैथी की दवाएं।
एक समय लेती है दूजी फौरन
कुछ आराम पहुंचाएं।
चरक संहिता में लिखा हुआ है
हरेक रोग का इलाज।
लक्षण से पहचान करें वैद्य जी
तब शुरू करें इलाज।
एलोपैथी में लक्षण एवं टेस्ट से
निर्धारित करें इलाज।
इसके डॉक्टर्स का अनुभव भी
तत्काल बना इलाज।
एक के इलाज में समय चहिए
मर्ज ठीक होजायेगा।
एक के इलाज में राहत चहिए
वरना वो मर जायेगा।
लंबे समय तक इलाज करता
आयुर्वेदिक ये पद्धति।
इमरजेंसी में सिर्फ काम आए
एलोपैथिक ये पद्धति।
दोनों के ही अपने-2 महत्व हैं
नामी हैं यह पद्धतियां।
चिकित्साविज्ञान की एक नई
दूजी पुरानी पद्धतियां।
वैसे तो हैं और भी चिकित्सा
की प्रचलित पद्धतियां।
होमियो यूनानी प्राकृतिक भी
हैं ये प्रभावी पद्धतियां।
एक्यूप्रेशर योग प्राणायाम भी
हैं ये प्रभावी पद्धतियां।
परंतु आयुर्वेदिक पद्धति बाद
की ही सभी पद्धतियां।
वैद्य सुखेन का संजीवनी बूटी
पुरातन रही पद्धतियां।
जोधाबाई के इलाज में किया
प्रयोग यही पद्धतियां।
इमरजेंसी में है प्रभावी केवल
एलोपैथी चि.पद्धति।
वर्तमान में है एलोपैथी केवल
जीवन रक्षक पद्धति।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
