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ज़ब ज़ब ये दिल सुकून -ए -पल महसूस किया
अगले ही पल गम ने आकर गले लगाया है
कैसे कदम बढ़ाये हम ज़िन्दगी के राहो मे
जहा तक भी देखो दूर दूर तक बस अंधेरा ही अंधेरा है
हर किसीका ख्वाब होता है ज़िन्दगी मे खुशियों का
हमने भी कुछ ऐसी ही सपने सजा रखे थे
क्या पता था खुदा ने लिखना ही भूल गए तकदीर मे हमारे
चंद रौशनी आस थीं हमें और मिला अंधेरा ही अंधेरा है
पहले समझ नहीं पाए हम लेकिन अब अहसास होगया
ये इश्क़ का दुनिया बस एक वहम का ठिकाना है
अनकहे ख्वाहिश लेकर आते है दिलवाले इस जहाँ मे
हर ख्वाहिश चूर होकर ज़िन्दगी मे मिलता बस अंधेरा है
दुनिया का पता नहीं पर साँसे इस दर्द को महसूस करते है
एक बार दिल टूटने के बाद लोग कहाँ जिन्दा रहते है
गर कोई हमदर्द मिलता भी है राहें ज़िन्दगी मे तो
वो भी चंद लम्हो के बाद परिंदे बदल लेते अपनी बसेरा है
जहा से भी गुज़रता है वो हमारी चाहत की शिकायत लिए
क्या कभी हमने भी उससे वफ़ा निभाया है..?
शायद नहीं आया मुझे ही मोहब्बत के रसमे निभाना
इसीलिए रब ने लिख दी हक़ मे मेरे अंधेरा ही अंधेरा है
ज़िन्दगी की इस तन्हाईयो मे अब किसीका इंतजार ना रहा
ये आँसू, ये जख्म, दर्द भरी आह नैना के लिए काफी है
काट लेगे सज़ा -ए -ज़िन्दगी जिसके काबिल है हम
बहुत कीमती तोहफा मिला महबूब से इस दिल के लिए
रौशन रहे दुनिया उनकी, कोई गम नहीं जो मिला हमें अंधेरा है…!!
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नैना…. ✍️✍️
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