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जब भी तन्हा होते तुमसे ही जा मिलते है
तेरी यादों के महफिल मे खुद को महफूज़ पाते है
नहीं पता मुझे अब कभी वो चाहत की आलम भी होगा
फिर भी तेरी मोहब्बत मे सनम खुद को ढालते जाते है
हर बात भूल गये हम दुनिया की तेरे इश्क़ मे सनम
साँसे भी रूठ जाती है जब तुझसे खुद को जुदा पाते है
तुम्हे नहीं अहसास की क्या हर्ष हुआ है इस दीवानी की
तेरे जाने के बाद सनम तुम्हारे यादों मे जीते जा रहे है
समझ नहीं आता किसको क्या जवाब दू अपने हालत का
राहो से गुज़रते जब कोई सनम तेरा हाल पूछ जाते है
शायद तुम्हे याद नहीं होगा लेकिन दुनिया भूली नहीं अभी
तेरे जाने के बाद भी सब तुम्हे मेरे दीवाने के नाम से जानते है
जानते है हम ये कभी ख़तम न होने वाली इंतजार है
फिर भी हम तुम्हारे राहो मे अपनी आंखें बिछा बैठे है
शायद कभी भूलकर ही गुज़रो हमारे विरान गली से तुम
तेरे जाने के बाद हम हर पल तेरी इंतजार मे बिताया करते है
हमेशा जो लुभाती थीं ये बहारे फिज़ाओ की मुझे
बिन तेरे ओ सनम ये बहारे भी पतझड़ सा फीका लगते है
नहीं भाते अब कोई श्रृंगार इस तन पे तेरे प्यार के बिना
कैसे बताऊ, तेरे जाने के बाद हम कितने अधूरी सी होगए है
थकने लगी ये होंठ नाम की मुस्कान सजाते सजाते
जब जब छूकर गुज़रती हवाएं जैसे साँसो मे चुभने लगते है
कुछ टूट कर बिखर जाता है सीने मे हमारे तेरा जिक्र सुनकर भी
तेरे जाने के बाद सनम हम कुछ इस तरह टूट कर बिखर गए है
बाँध रखा है तेरे दी हुई कसमो ने मुझे अब तक जान…
इसीलिए घुट घुट कर भी हम साँसे लिए जा रहे है
मिटा देते कब का ये विरान सी ज़िन्दगी अपनी कसमसे
पर क्या करें तुम नहीं तो हम मोहब्बत के कसमें निभाए जारहे है
जाने क्यों असर नहीं होता तुम्हे मेरी चाहत का ओ ज़ालिम
सूनके मेरे दर्द-ए-दिल की दास्ताँ यहा पूरी महफिल रो दिए
कैसे लिख दें नैना मोहब्बत के नशीली अहसास गज़ल मे अपनी
तेरे जाने के बाद सनम,इस दीवानी से बस दिल की तड़प ही लिखें जाते है…!!
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नैना… ✍️✍️✍️
काल्पनिक…
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