वक्त जाता रहा और आता रहा,ज़िंदगी यूँ ही गुजरती रही।
जिंदगी का एक और साल कम होने चला,
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला, कुछ ख्वाईशें दिल में रह जाती हैं, कुछ बिन माँगे ही मिल जाती हैं,
कुछ हमें छोड़कर चले गये,
कुछ नये जुडेंगे इस सफर में, कुछ मुझसे बहुत खफा हैं, कुछ मुझसे बहुत खुश है,
कुछ मुझे मिलकर भूल गये, कुछ मुझे आज भी याद करते है, कुछ शायद अंजान है, कुछ बहुत परेशान है, कुछ को मेरा इंतजार है, कुछ का मुझे इंतजार है,
कुछ सही हैं, कुछ गलत भी हैं, कोई गलती हो तो माफ कीजिए, कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिए।
बस इतनी सी है जुस्तजू 2022 से बेहतर 2023 के हालात हों।
गम गिला होकर काफूर हो सकें।
खुशियों की बरसात में भागें सभी।
चाहे मेरा सबकुछ लगे दांव पर।
चलो आलिंगन करें इन उम्मीदों का,
जब भी हाँथ उठें ऐ रब! दुआ में , सलामती की सौगात देना भर इसमें।
           रचयिता –
            सुषमा श्रीवास्तव
               मौलिक भाव ,सर्वाधिकार सुरक्षित, रुद्रपुर, उत्तराखंड।

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