आज फिर सरहदों पर गोलियां चलीं हैं
देश का एक सपूत आज फिर शहीद हो गया है
उसका भी अपना एक घर संसार है
फिर भी देश के लिए आज वह कुर्बान हो गया है
वह देश का सैनिक है देश का अभिमान है
वह देश के लिए गोलियां खाता अपने सीने में है ।
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स्वरचित
सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
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