क्रूर काल ने ऐसा घेरा,छीन लिया देश का लाल।
भारत का वो पराक्रमी,अद्वितीय था ऐसा लाल।
रग-रग में था देश प्रेम,हर सांस में उसके भारत।
रोम-रोम में लिखा हुआ,अतुलित साहस भारत।
देश का सिरमौर था वो,ऐसा था वीर महायोद्धा।
भारत का गौरव थे वो,देश का था कुशल योद्धा।
कारगिल युद्ध का हिस्सा,रणनीतिकार थे अच्छे।
दुश्मनों को मार गिराया,दुम दबाए भागे थे बच्चे।
थलसेना में जनरल रहे,पर एक इंसान भी अच्छे।
सेना में कुछ परिवर्तन के,पक्षधर सदैव रहे सच्चे।
सर्जिकल स्ट्राइक एवं,एयर स्ट्राइक भी करवाया।
आतंकवादियों के अड्डे को,है नेस्तनाबूद कराया।
कश्मीर में सेना आज,चुन-चुन मार रही आतंकी।
रावत की ये योजना है,रोज ढेर होरहे हैं आतंकी।
तीनों सेना की मजबूती,को दियाहै नया आयाम।
जल थल हो या नभ सेना,पाएहैं नए-नए समान।
युद्ध पोत लड़ाकू विमान,नए साजो समान तोपें।
पनडुब्बी एवं मिसाइल,टैंक फाइटर जेट व तोपें।
तीनों सेनाएं लैश आजहैं,आधुनिक हथियारों से।
शत्रु आँख दिखाए तो,वो झेल न पाएगा मारों से।
असमय और अचानक,हो गया भयानक हादसा।
सेना का चॉपर क्रैश,भीषण आग से यह हादसा।
जल कर हुए शहीद सैनिक,चौदह में से बारह ये।
रावत की पत्नी मधूलिका,सभी मिलाके तेरह ये।
प्रथम सीडीएस थे देश के, जनरल विपिन रावत।
सम्पूर्ण देशवासी आहत,जब हुए शहीद हैं रावत।
दौड़ रहा था पूरा देश,श्रद्धांजलि उन्हें देना चाहा।
एक पुष्प स्वश्रद्धा के,उन्हें समर्पित करना चाहा।
शत-शत नमन अमर शहीदों को,बारंबार प्रणाम।
देश भुला न पाएगा तुमको, कोटि-कोटि प्रणाम।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
