बच्चा जब आता है गर्भ में माँ के।
ख्वाब देखती है माँ तरह तरह के।
मैं अपने बच्चे को क्या दूँ उपहार।
खिलौने वस्त्र ममता के संग प्यार।
कभी ऊन सलाई ले स्वेटर बनाए।
कभी टोपी और पायजामा बनाए।
तरह-2 के रंग बिरंगे बुनती स्वेटर।
ठंडक से यही बचाए बच्चा स्वेटर।
मेरे जीवन की सर्दी का ये उपहार।
माँ के ममता का परिचायक प्यार।
यूँ तो माँ की गोदी ही गर्मी देती है।
माँ का लाड़ प्यार स्वेटर ये देती है।
गर्म वस्त्र है बहुत जरूरी ठंडक में।
देता है आराम  बहुत यह ठंडक में।
सर्दी में पशु पक्षी भी ये ठिठुरते हैं।
बूढ़े  बच्चे  जवान सभी ठिठुरते हैं।
माँ के हाथों का बुना हुआ उपहार।
इस स्वेटर में भरा हुआ है माँ प्यार।
ये स्वेटर माँ के हाथ की निशानी है।
सर्द दिनों से जुड़ी हुई ये कहानी है। 
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव,प्रतापगढ़,उ.प्र.
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *