⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
इरादे नेक,नियत सच्ची हो—
तो कामयाबी कदम चूमती है ,
ईश्वर का आशीर्वाद बनकर—
इर्द-गिर्द घूमती है,
क्या हुआ जो तुम—
थोड़े से नादान हो ,
इस शतरंजी दुनिया से—
थोड़े से अनजान हो,
पासे फेक रहे हैं—
सब अपनी अपनी मर्जी से,
दिलों को आहत करते हैं—
अपनी ही खुदगर्जी से,
लेकिन वो उंगली पकड़े है—
सही राह दिखा रहा है,
हर मुश्किल से पहले ही —
हम को बचा रहा है,
लेकिन उसकी कृपा से—
हम फिर भी अनजान हैं—
नादान है थोड़े से —
क्योंकि हम इंसान हैं।
संगीता वर्मा✍✍
