माना अब तू नहीं ,
पर तेरा नाम अब भी यहीं है।
तुझसे मिला प्रेम भी यहीं है।
तुझसे मिलती जो पहचान मुझे,
वह पहचान यहीं है।
माना तू अब नहीं ,
पर जो अरमान तेरे अधूरे रह गये,
वो अरमान भी यहीं हैं।
तेरी आत्मा का उद्बोधन,
तेरी मनोवृतियां का प्रतिफलन,
मेरे शरीर से आती तेरी गंध यहीं हैं।
माना तेरी देह अब नहीं,
पर मेरे लिए तेरा मोह यहीं है।
मां तू यहां न होकर भी हर जगह है।
तेरी तकती निगाहें…. तेरी मुझसे उम्मीद यहीं है।
मां तू मुक्त होकर पवन सी हो गई,
कहीं दिखती नहीं पर अब हर जगह शामिल है,
माना अब तू नहीं…..
पर मेरे होना ही अब तेरा होना है,
मेरे मन के हर कोने में तेरा ठिकाना है।
मां माना तू अब नहीं….
___”पाम “
