एस्ट्रौनोमर्स स्पेस प्रयोगशाला…!
वैज्ञानिक तैयारी कर रहें हैं नए प्रोग्राम की…उसके लिए उन्होंने विशेष पौधशाला और कृतिम उपकरण तैयार कर रहे थे..! उस मिशन में कुछ रोमांचक होने वाला था..!
कुछ कमियों को टीम दूर करना चाहती थी जो ,विगत मिशन में चूकें हुई थीं वे दोहराई ना जाऐं इस बात का ध्यान रखा जा रहा। था …!
सौफी और जैदी को टीम में मुख्य भूमिका दी गई….!
एक काफी बड़े मॉनीटर की स्क्रीन में सौफी टीम को बता रही थी ,” ये देखें ..! यहां हमारे इसरो सेंटर से यान उड़ेगा और इसकी गति 40,000कि मी.  / घंटा होगी..! यह अपने समय से एक  से दो हफ्ते अंतरिक्ष कक्ष में पहुंचेगा..! आप लोगों की सारी तैयारी हो गई होगी .!”
सभी एक साथ टीम के सदस्य  बोले :जी…!”
सौफी  उत्सुकता से बोली –,” आप सबको अपने को मेंटली व फिजिकली  तैयार करना है ..पूरे छः महीने ट्रेनिंग में लगेगें ..! This is the month of October. Get ready with your final target.Thanks to all members.”
अब साइंटिस्ट जैदी बोले-“, हम सभी परिवार के सदस्यों की तरह हैं..और सबको अलग अलग विभागों में  बांट दिया है…! You people will have less time to launch your future project..! Dead line will be 1st of March. टेक केयर !”(कम समय है आपके प्रायोजन के भविष्य लिए  ,और अंतरिम तीथी 1 मार्च)
साइंटिस्ट कर्म बोले,” सभी सदस्य अपने लिए स्पेस शैटल में जाने के लिए विशेष कपड़े लें लें.. वातावरण  के अनुकूल ..और हां हम विशेष प्रयोजन से जा रहें हैं..! जैसा आप साइंटिस्ट को जानकारियां दीं हैं ..!”
एक अनोखा मिशन- टास्क ..”अंतरिक्ष में  क्या जीवन सम्भव है ? यदि है तो कौन से विशेष परिस्थितियों पर .! कैसे  प्रयोजन जीवन की सम्भावनाएं तलाशने के लिए उपयुक्त होंगे ..!
“दूसरा—
समय की गति से पहले अंतरिक्ष में कैसे पहुंचा जाए…लाइट की स्पीड से पहले असम्भव ही है..क्योंकि रास्ते में फ्यूल समाप्त होने पर रास्ते में  अंतरीक्ष -यान क्रैश होने की संभावना है ..!”
प्रोफेसर सौफी की आवाज में चिंता थी..
“आगे मिशन में प्रौक्सी बी की कल्पना की गई है ..जो पृथ्वी की तरह ही एक गृह है…परंतु उस तक पहुंचना नामुमकिन ही है..!”
यान के पीछे ब्लैक हॉल के निर्माण किया  जाए जिसमें 630000 करोढ़ करीब ऊर्जा की आवश्यकता है…! कितना कल्पना शील प्रयोजन है जिसको करना टेढ़ी खीर ही लग रहा था …।
मकसद साफ था ;
एक ऐसा मिशन तैयार करना था जो की लाइट की स्पीड के बराबर तो नहीं चल सकता परंतु ,उससे कम पर अंतरिक्ष में जा सकता है…।
उसके लिए वॉम होल तैयार करने थे जो, कि अपने अंदर ब्लैक होल बना सकते थे, जिसके द्वारा यान सुरंग की भांति  “प्रोक्सी -बी “तक पहुंच सकता है..!”
वैज्ञानिक अंश भी पुराने मिशन से जुड़े थे वे भी अपने विशेष अंदाज़ में बोले—
“प्रौक्सी- बी” तक पहुंचने के लिए सोलह से सत्रह वर्ष लग सकते हैं…! उसमें सफर पांच महीने केवल लग सकता है..!”
दूसरा अजब बात यह थी कि:
इन वॉम होल में एक बात ये थी कि ये डिस्ट्राए हो सकते हैं..और लहर पैदा कर सकते हैं..लेकिन बीच में टूट सकते थे..!
चुनौती यही थी कि इतनी ऊर्जा पैदा की जाए जो आइंसटाईन की “थ्योरी औफ रिलेटिविटी ” को मैच कर जाए…प्रकाश वर्ष से थोड़ा कम ही हो सकता था.. !
उनको तीन महीने से ट्रेनिंग दी जा रही थी..! “जीरो ग्रेविटी”centrifugal force जिसमें निर्यात में शून्य मानक पर एक पहिए में जोर से घुमाया जाता है..ताकि वातावरण के अनुसार स्वयं को ढाल पाएं..! सारे मेडिकल टेस्ट किए गए.. सभी ठीक थे..!
देश भर के अखबारों में सुर्खियों बटोरी
दूसरा स्पेस क्राफ्ट कब जा रहा है?
मिशन चंद्र एक के बाद मिशन प्रसन्न जा रहा है..!
आज 1 मार्च को “यान प्रसन्न ” को छोड़ा जाना था ..सभी वैज्ञानिक अपने अपने स्थान पर जमे थे..आवाज आ रही थी रडार पर…
उल्टी गिनती शुरु हुई.. और
९०,९,८,७,६,५,४,३,२,१ ,० और …..ये टेक ऑन किया प्रसन्न ने..!
वहाँ पर वैज्ञानिक प्रयोगशाला ..और सभी वैज्ञानिक स्पेस सूट में  थे ।
आठवें दिन स्पेस शिप चंद्र पर पहुंचा..! अनुभव बहुत ही रोमांचक था,ना भूलने वाला क्षण था …।
वहाँ पहुंचकर , सर्वप्रथम वायु के लिए गैसों में घुलनशील ऑक्सीजन व अन्य गैसों  जैसे कार्बन के यौगिक तत्व , नाइट्रोजन के अणुओं  से कृतिम धरती तैयार की..! जो कि, सफलता का दूसरा चरण था ..। विशेष रूप से कृतिम पौधे लगाऐ..!
 वे पौधा जिसके लगने से वायु रूपी ऑक्सीजन का सृजन होता हो,वे  पादप कोशिका में..और एक से अनेक पौधे जैनेटिक प्रजनन से उत्पन्न किए गए…!
वहाँ डॉ और वैज्ञानिकों के बीच सनसनी  खोज का विषय होने जा रहा था..! सब के चेहरों पर मिशन के सफल होने की खुशी थी जिसे बयां नहीं कर सकते थे ..।
समय हुआ और डॉ नृव ने भारी स्पेशल स्पेस सूट पहने थे, गरूत्वाकर्षण शून्य होने के कारण हवा में तैरता हुआ सब कुछ ,थमा सा था ,वक्त भी,एक दूसरे की आवाजें भी…! 
और तो और पानी का ग्लास हाथ छिटका धीरे से तो स्लोमोशन में लगा तैरती हुआ… किताब ,कॉपी ,पेन  कुछ तैर रहा था..!
ये अंत नहीं प्रारंभ है कहानी का…!
अभी तो मिशन “प्रौक्सी बी” जाना है…!
“विज्ञान अंत नहीं हो सकता…रास्ता हो सकता है..बहुत रास्तों का एक सरल रास्ता…!”
सुनंदा..☺️
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