आज के समय में कोई ही ऐसा घर होगा जहां सुबह और शाम की चाय ना बनती हो । चाय ने हमारे जीवन में अपना एक अलग ही स्थान बना लिया है लेकिन चाय ही मेरी शादीशुदा जिंदगी में अपनी मिठास घोलकर  प्यार के अनंत सागर में गोते लगाने की प्ररेणा बनेगा ये मैं नहीं जानती थी। हमारा परिवार संयुक्त परिवार था इसलिए हम नवविवाहित जोड़े को आपस में बात करने के लिए बहुत कम ही समय मिल पाता था । हम एक-दूसरे के साथ के लिए कोई ना कोई बहाना ढूॅंढा करते थे जिससे हम एक-दूसरे के साथ समय भी व्यतित कर लें और परिवार के लोगों को कोई आपत्ती भी ना हो। घर में बात करना संभव नहीं होता था इसलिए मेरे पति के एक दोस्त की चाय की दुकान थी हम दोनों वहीं बैठ कर चाय के साथ प्यार भरी बातें करते थे । सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वहां पर जो चाय मिलती थी वो कुल्हड़ के कप में ही मिलती थी । मैंने भी पहली बार कुल्हड़ वाली चाय वहीं पर पी थी उससे पहले मैंने ये चाय नहीं पी थी । मुझे भी यह चाय पसंद आई क्योंकि इसका स्वाद जो हम घर में चाय पीते है उससे बहुत अच्छी लगती है। जैसे -जैसे कुल्हड़ की चाय का कप बढता गया  हमारे बीच भी  प्यार बढ़ता गया । आज मैं दो बच्चों की माॅं हूॅं लेकिन आज भी जब भी हमें आपस में कोई बात करनी होती है हम उसी कुल्हड़ वाली चाय की दुकान पर जाकर चाय की चुस्कियों के बीच बातें करते हैं और वहां से एक तरह से तरोताजा महसूस करके घर के लिए निकलते हैं। आज भी मैं अकेले में सोचती हूं कि –
      ” कुछ      तो    बात    है    उस 
         कुल्हड़      वाली    चाय    में 
         वरना   आज    मेरी    जिंदगी 
         इस  तरह खुशनुमा नही  होती “।
                                                 धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
       ” गुॅंजन कमल ” 💓💞💗
         
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