प्यार तो बस होता प्यार,
उसको तुलनात्मक अध्ययन न यार,
कोशिश करो जिससे भी हो,
या जो आपको करे, करो उसे वेशुमार।
सब सह लेता उसके वास्ते,
सबसे हंसीन लगते उसके साथ के रास्ते
सबकी बातें लगती बेकार ऐसा ही होता प्यार।
कब किसी की सुनता है
अपने ही आशमा अपने ख़्वाब चुनता है,
हटता ही नही छाता जो खुमार ।
समाज कानून कायदे कुछ न रहता याद
सारे रिश्ते नाते रख देता उठाके ताख,
क्योंकि अंधा होता प्यार।
फिर क्या बन जाती वजाह,
जो प्यार लगने लगता खता,
शायद फरेबी हो चला अब प्यार।
इसी लिए जहां था प्यार ही प्यार,
सोचना आखिर क्यों,
उससे दो गुनी पकड़ती नफरत रफ्तार।
कभी किसी के साथ न करना खिलबाड़,
बरना तवाह कर देगी तुम्हे ,
उसकी आँखों से बहती आसुओं की धार।
कभी बहुत खामोश रह जाती घुटके,
जैसे डाल से रह जाती डाली टूटकर
भरी बहार।
कोशिश करना कभी न बने तुम्हारा,
प्यार,नफरत वाला प्यार।
न तोड़ना कभी किसी का एतवार।
सौ मोहब्बत के निभाए गए वादों से,
कहीं ज्यादा आह भरा होता एक टूटा हुआ विश्वास,
कर देगा अपनी नफरत से तुम्हारा गुलिस्ता बेजार।
अन्जू दीक्षित,
उत्तर प्रदेश।
