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गुज़र रहा है ज़िन्दगी मे वक़्त जैसे मुठ्ठी से रेत की तरह
वैसे ही लोगो के दिल से इंसानियत व संस्कार मिटते जारहे है
भूलने लगे है अपने ही भारतीय सभ्यता को हम हिन्दू ही
भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
नहीं रखती मायने आजकल हिन्दुओ मे अब वेद पुराणों की बाते
हर किसीको नये ज़माने से कदम से कदम मिला कर चलना है
मिटने लगे है दिलो से अपनों की एकता लोग बने स्वार्थी जैसे
भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
कितना मनमोहक हर सुबह शाम लगते थे ज़ब मंदिर मे शंखनाथ होते थे
महिलो की टोली ज़ब हर सुबह शाम मंदिर से घर या घर से मंदिर होते थे
साज श्रृंगार से सजी चेहरा सर पे घूँघट ओढे मारे शरम के
अब ऐसी मनमोहनी दिर्ष्य जैसे कोई सपना सा लगने लगा है
बड़े लोग है दौलत है तो सूट बुट पहने भी महाराजा कहलाते है अब
गाँव के लोग जो पहन कर धोती कुरता निकले शहरों मे तो जाहिल गवार कहलाते है
कैसा प्रकोप है इस पाश्चात्य संस्कृति का हम भारत वासियो पर
जो भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
अपने बड़ो के राह पर चलते है बच्चे कहावत ये सही है
माँ बाप खाये ज़ब बर्गर पिज़्ज़ा तो बच्चों को कहाँ लगे रोटी सब्ज़ी सही ये
जाने किस ज़माने मे दब के रह गए ज़ब सुबह शाम दही चुरा खाते थे लोग
अब तो हर किसी के लिए बिदेशी खाना ही स्वादिस्ट लगने लगे है
खुद के बेटी को रखे बचपन से बिदेशी प्रिंसेस बनाकर
पर बहू मे इन्हे आजकल बिलकुल सुन्दर मॉडल चाहिए
भले न हो उसमे सादगी व संस्कारी पर बोलचाल मे इंग्लिश आनी चाहिए
कुछ इस तरह भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
नहीं देता महत्व उस लड़कियों को कोई आजकल
जो अपनी संस्कार भरी चुनर अपनी कंधे से संभाली रखती है
क्यों भाने लगे क्योंलड़कियों को जीन्स और टॉप मे घूमना
चूड़ी, पायल, झुमके, काज़ल और बालो मे गज़रा कोई बोझ सी लगने लगे है
भारतीय नव वर्ष होली मे रंग उड़े न उड़े अपने के जीवन मे
पर happy new year को आतिश बाज़ी होनी ही होनी है
घर छोड़कर पढ़े होते है लोग मयखाने मे खुशी के बहाने के नाम पर
कुछ इस तरह भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
पहले भी प्रेम विवाह,वर्ष गांठ या जन्मदिन होते थे जीवन मे
पर इतना भी क्या बदला की अपने रीती रीवाज़ो से ही मुँह मोड़ ले
नहीं रहा क्यों लोगो के दिल मे अपने रस्मो रीवाज़ो के लिए सम्मान कोई
क्यों इतना भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
हर किसी के ज़िन्दगी मे बिद्या का होना बहुत महत्वपूर्ण होता है
हमारे मानव जाती का मार्ग दर्शक ही हमारा संस्कृती होता है
क्यों जरुरी है लोगो के लिए बच्चों की इंग्लिश स्कूल या कॉलेज मे ही पढ़ाने की
ज़ब भारतीय होने का पहचान तक हिंदी मे वो बच्चे लिख पढ़ व नहीं पाते है
हर किसी के ज़िन्दगी मे परिवर्तन होना अच्छी बात मानते है
पर इतना भी नहीं की अपना हिन्दू होने की वजूद ही न रहे
हम क्यों भूले भारतीय होकर अपनी भारतीय सभ्यता
ज़ब दूरसे देशवासी भी हमारे भारतीय संस्कृति को मानने लगे है
आए दिन ऐसी घटना सामने आती है ज़िन्दगी मे हमारे
ज़ब किसी मोड़ पर किसी मासूम की ज़िन्दगी को ज़लील कर दिया जाता है
नहीं कहता कोई कुछ उनके खिलाफ पर अत्याचार करते देख लेते है
माँ धरती के पवित्र आँचल मे कायरता का भी दाग़ लगाने लगे है
नहीं लगता अब दिल लोगो के यज्ञ और त्यौहारो मे
चलता है देर रात तक बिदेशी गाने क्लब और मयखानो मे
नहीं भाती इन्हे सुरु दास और कवियों की मधुर वाणी
अब तो भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगे है
नहीं आता हमें भी भारतीय सभ्यता पर दिल से हम हिन्दू है
भले बड़े ज़िन्दगी मे आगे पर भारतीय होने का संस्कार भी न भूले
अभी भी कुछ ज्यादा नहीं बिगड़ा अब से भी सम्भल जाए प्रस्तिथिया ज़िन्दगी की
तो ये भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ने से हम रोक सकते है….!!
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नैना…. ✍️✍️🙏🙏
