मराठी काव्य को दिया जिसने विस्तार
करती थी जो हर क्षण शिक्षा का प्रसार
जिसने माना था शिक्षा है जीवन आधर
सावित्रीबाई फुले चाहती थी समाज सुधार
तीन जनवरी अठारह सौ इकत्तीस दिन आया 
नयागाँव जिसके आँचल में ये पलछिन आया 
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका ने अवतरण लिया 
स्त्रियों में शिक्षा के अधिकार का अलख जगाया
विधवा विवाह अछूत हर भेद पर किया प्रहार 
था हर ओर हर पल विरोध का नारा बुलंद 
ईंट पत्थर गंदगी की मार कर समाज ने डराया 
इच्छा शक्ति प्रबल हर विरोध का किया संहार 
कदम कदम पर साथ मिला जीवनसाथी का 
ज्योतिब फुले बने पति गुरू मार्गदर्शन उनके 
ज्योत बन पत्नी को दिया अपना सदैव समर्थन 
अज्ञानता मिटाने में जीवन भर साथ निभाया 
थको नहीं आगे बढ़ो शिक्षा को शस्त्र बनाओ
भयाक्रांत मन को उठा बाहर फेंक आओ 
पढ़ो लिखो सीखो सिखाओ ज्ञान अपनाओ 
सावित्रीबाई फुले सा जीवन कर्मठ बनाओ
आरती झा(स्वरचित व मौलिक) 
दिल्ली 
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