हम कर बैठे हैं तुमसे प्यार तुम मानो या न मानो
मैंने मन से तुमको अपना मान लिया तुम मानो या न मानो
हमने तुमको पहचान लिया तुम पहचानो या न पहचानो
बसती है तुम में ही जान तुम जानो या ना जानो
कैसे तुम्हें बताऊं मैं तुम जान हो मेरी
जब देखता हूँ आईना लगता है तुम पहचान हो मेरी
मैंने तो तय कर लिया हर हाल मे तुमको पाना है, तुम मानो या न मानो
रहना है मुश्किल बहुत बिन तेरे
बस जा तू ह्रदय मे मेरे
कर सब कुछ दिया तेरे नाम
तुम मानो या न मानो
यादें वहुत सताती है, हर पल याद दिलाती है
है कोई अपना तेरा खुद को एहसास कराती है
मैंने तो अपना लिया तुमको तुम मानो या न मानो
धन्यवाद
सत्येंद्र पाण्डेय ‘शिल्प’
गोंडा उत्तरप्रदेश
