‘ भूख एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज हमें रोज-रोज करना पड़ता है । यें डाॅक्टरों द्वारा कहा जाने वाला शब्द आराम हम जैसे गरीबों के लिए नहींl बल्कि अमीरों के लिए है क्योंकि हम जैसे गरीब लोग तो बीमार पड़ने पर भी घर बैठकर आराम नहीं कर सकते । अगर हमें भूख जैसी बीमारी से लड़ना है तो इसके लिए मुझे बाहर जाकर काम करना ही पड़ेगा ताकि घर में चार पैसे आ सके और हम सब की भूख मिट सके ।’ खांसते हुए गणेश ने अपनी पत्नी से कहा ।
‘ आप चले जाइएगा लेकिन पहले ठीक तो हो
जाइए ।’ गणेश की पत्नी ने अपने पति की तरफ पानी का गिलास बढ़ाते हुए कहा ।
‘ घर में अन्न का एक दाना तक नहीं है और तुम कह रही हो कि मैं ठीक हो जाऊं उसके बाद काम पर जाऊं ।’ गणेश ने खाट पर से उठते हुए कहा ।
‘ कहीं ना कहीं से मैं इंतजाम कर लूंगी आप चिंता ना करें । शाम होने वाली है और आज तो ठंड कुछ ज्यादा ही है । दोपहर से ही ठंडी – ठंडी हवाएं चल रही है इसलिए आज ठंड बढ़ गई है । आप चुपचाप लेट जाइए और डॉक्टर ने जो दवा दी है इसे खा लीजिए ।’ गणेश की पत्नी ने गणेश को वापस खाट पर बैठाते हुए कहा ।
‘ लाओ मैं दवा खा लेता हूॅं ।’ कहते हुए गणेश ने अपना हाथ आगे बढ़ाया ।
गणेश की पत्नी ने जल्दी ही स्टोव पर पानी को हल्का गुनगुना किया और उसे गिलास में लेकर गणेश के हाथ में पकड़ा दिया पास ही टूटी हुई मेज पर गणेश की बुखार की दवा पड़ी हुई थी । उसने दवा उठाई और गणेश की तरह बढ़ा दिया । गणेश ने भी अपनी पत्नी के हाथ से दवा ली और उसे अपने मुॅंह में रखकर गटागट पानी पीने लगा । गणेश की पत्नी अपने बच्चे के रोने की आवाज सुनकर दूसरे कमरे में रखे खाट की तरफ चली गई तभी गणेश उठा और मेज पर कुछ ढूंढने लगा ।
‘ रमा … ओ रमा .. टैक्सी की चाबी तुमने कहाॅं रख दी ? ‘ गणेश ने चिल्लाकर कहा ।
गणेश की पत्नी कुछ बोलती उससे पहले ही गणेश उसे गणेश की आवाज सुनाई पड़ी ।
‘ चाबी मिल गई मुझे । मैं कल सुबह तक आता हूॅं । तुम लोग मेरी चिंता मत करना । मैंने दवा खा ली है और अच्छा महसूस कर रहा हूॅं । आज हाईवे पर जा रहा हूॅं वहाॅं पर रात में सवारी मिल जाती है और तो और हाईवे पर अच्छी कमाई भी हो जाती है इसलिए आज उसी तरफ जा रहा हूॅं ।’ गणेश ने इतनी जोर से कहा कि दूसरे कमरे में उसकी पत्नी को सुनाई दे दें क्योंकि वह जानता था कि उसकी पत्नी अपने एक साल के बेटे को अपना दूध पिलाकर चुप करा रही है ।
अपने पति की बात सुनकर गणेश की पत्नी बच्चे को दूध पिलाना छोड़कर जल्दी से बच्चे को गोद में लेकर बाहर वाले कमरे की तरफ भागती हैं लेकिन तब तक वह कमरा खाली हो चुका होता है । खाली कमरे को देखकर वह बाहर की तरफ भागती है । बाहर कोहरा घिरने लगा था तभी तो उसे उसका पति तो दिखाई नहीं दिया । थोड़ी दूर आगे दौड़कर जाने पर उसे दिखाई दिया तो सिर्फ टैक्सी का नंबर और टैक्सी में जल रही पीछे की लाइट । दुखी मन से वह अपने टीने से बने मकान में वापस आ जाती है और उसकी ऑंखों से ऑंसू निकल कर उसके गालों पर लुढ़कने लगते हैं । इस भूख और गरीबी के कारण उसके पति को बुखार में भी पैसे कमाने के लिए इस सर्द कोहरे वाली रात में बाहर जाना पड़ा यह सोच कर उसका दिल बैठने लगता है । हमेशा से ही ” जितना भगवान ने दिया है वह हमारे लिए बहुत है ” की सोच रखने वाली रमा आज पहली बार अपने आप को लाचार महसूस कर रही थी । आज उसे भी अपनी गरीबी देखकर रोना आ रहा था ।
उधर गणेश अपनी टैक्सी लेकर हाईवे पर खड़ा था । ठंड बढ़ती जा रही थी साथ ही कोहरा भी था हालांकि उसने अपने आप को पुराने स्वेटर और पुराने शाॅल से ढॅंक रखा था लेकिन फिर भी गरीबी की हालत में जीने वाले लोगों के पास पुराने स्वेटर और शॉल कैसे होते हैं ? गणेश को देखकर इसका अंदाजा देखने वाले बखूबी लगा सकते थे । कुछ देर तक तो वह अपने टैक्सी के बाहर खड़ा रोड के दोनों तरफ सवारी को देखता रहा और साथ ही भगवान से प्रार्थना करता रहा कि किसी सवारी को उसके पास भेज दें ताकि उसके और उसके परिवार के खाने का इंतजाम हो सके ।
सर्द रात की ठंड कोहरे के कारण बढ़ने लगी थी । जब गणेश को यह बर्दाश्त नहीं हुई तो वह अपनी टैक्सी के अंदर आ गया । करीब आधा घंटा बीतने के बाद जब कोई सवारी उसकी टैक्सी के पास नहीं आई तो मन ही मन कुछ सोचते हुए अपनी गाड़ी को बाबा के ढा़बे की तरफ बढ़ा दिया । ढा़बे पर अपनी टैक्सी रोक उसने चारों तरफ अपनी नजरें दौड़ाई । बहुत चहल-पहल थी बाबा के ढा़बे पर । पहले भी जब उसे सवारी नहीं मिलती थी तब वह वहीं पर आ कर बैठता था और उसे सवारी मिल ही जाती थी । यही सोचकर उसने अपनी टैक्सी को यहाॅं लाकर खड़ा कर दिया था । अपनी टैक्सी से बाहर निकल कर वह टैक्सी के सहारे खड़ा हो गया ताकि कोई सवारी उसे देख कर उसकी तरफ आए ।
‘ अरे भाई ! लखनऊ चलोगे ?’ अपने पीछे से आती आवाज सुनकर गणेश जैसे ही पीछे मुड़ा उसने देखा कि एक ३५-३६ वर्ष का आदमी बड़ा सा सूटकेस के साथ उसके पीछे खड़ा है ।
‘ लखनऊ पहुॅंचने में ही सुबह हो जाएगी और मुझे तो अपने घर सुबह तक पहुॅंचना था ।’ गणेश ने उस आदमी को देखते हुए कहा ।
‘ सोच लो ! मैं तुम्हें वहाॅं तक जाने के लिए दुगुने पैसे दूंगा ।’ उस आदमी ने गणेश की तरफ देखते हुए कहा ।
गणेश की समझ में कुछ नहीं आ रहा था । अभी तक दूसरी कोई भी सवारी उसे मिली नहीं थी और एक मिली भी तो वह उसे इतनी दूर जाने के लिए कह रहा था कि सुबह तक उसका अपने घर लौटना असंभव था साथ ही कोहरा ऐसा था कि उसे बहुत संभलकर गाड़ी चलानी होगी । यें सभी बातें उसकी सोच में शामिल थी साथ ही गणेश यह भी सोच रहा था वह सवारी उसे लखनऊ जाने के लिए दुगुना भाड़ा देने को क्यों तैयार हैं ?
‘ सोच क्या रहे हो भाई ? चलो तुम्हें तिगुना भाडा़ दे देते हैं लेकिन मुझे लखनऊ पहुॅंचा दो । मेरा वहाॅं पर सुबह तक पहुॅंचना बहुत जरूरी है । मेरी कल लखनऊ में इंपॉर्टेंट मीटिंग है और मैं मीटिंग में देरी से नहीं पहुॅंचना चाहता ।’ उस बड़े से सूटकेस वाले आदमी ने गणेश की तरफ मुस्कुराकर देखते हुए कहा ।
ज्यादा पैसों का लालच और उस पर से परिस्थितियां ऐसी हो कि उस पैसे की उसे उस वक्त सख्त जरूरत हो ऐसी स्थिति में इंसान का ईमान डगमगा जाना स्वाभाविक ही है । गणेश ने भी अपनी स्थिति को देखते हुए लखनऊ जाने का फैसला कर लिया । सवारी अपने सूटकेस के साथ गाड़ी में बैठ चुकी थी और गणेश लखनऊ की तरफ रवाना हो चुका था ।
एक पल को तो गणेश को लगा कि उसके पीछे बैठी सवारी का मोबाइल फोन बजा है जिसमें से किसी बच्चे की रोने की आवाज आ रही है तभी तो गणेश ने उस सवारी से कहा भी कि आपका फोन बज रहा है आप फोन उठाइए । उसने अपने टैक्सी के मिरर से उस सवारी की तरफ देखा । वह सवारी पसीने से तरबतर हो रहा था ।
‘ साहब बात क्या हैं ? मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है कहीं आप …. गणेश अपने शब्दों को पूरा कर पाता इससे पहले ही उस सवारी ने उसकी कनपटी पर बंदूक तान दी ।
‘ साले … बिना किसी चू – चपर के गाड़ी चला और मुझे जल्दी से लखनऊ पहुॅंचा ।’ उस आदमी की बातें और अपनी कनपटी पर तनी बंदूक को महसूस कर गणेश की घबराहट बढ़ने लगी । कुछ पल बाद उसने अपनी घबराहट पर काबू पाते हुए उस आदमी से कहा :- ” साहब ! आप जो कर रहे हो वों ठीक नहीं कर रहे हो । किसी बच्चे को यूं चुरा कर ले जाना अच्छी बात नहीं है और बच्चे के रोने की आवाज सुनकर मुझे लग रहा है कि वह बच्चा ३ -४ साल का होगा । रास्ते में पुलिस ने हमें पकड़ लिया तो आपके साथ – साथ मुझे भी इस अपराध का दोषी मानकर मुझे भी सजा मिलेगी और मेरी बीवी – बच्चे जो मेरा घर पर इंतजार कर रहे हैं उनको मैं क्या मुंह दिखाऊंगा ?”
‘ चुप … बिलकुल चुप …. ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है । लखनऊ पहुॅंचकर तुम्हारे भाड़े के अलावा मैं तुझे पचास हजार और दूंगा । अब तुम्हारी जिम्मेदारी है मुझे सही सलामत मेरे ठिकाने पर पहुॅंचाने की और ध्यान रखना अगर मैं पकड़ा गया तो तुझे भी नहीं छोडूंगा । मैं पुलिस के सामने यह कहूंगा कि तू मेरा पार्टनर है और हम दोनों ने मिलकर इस बच्चे को चुराया है ।’ उस आदमी ने गुस्से से गणेश की तरफ देखते हुए कहा ।
‘ साहब ! मैं अब भी …. गणेश आगे कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसके सर पर एक जोरदार वार हुआ जिससे उसके गाड़ी का बैलेंस भी बिगड़ गया । किसी भी तरह उसने अपनी टैक्सी को बैलेंस किया और सड़क के किनारे पर रोक दिया । उसने अपने दोनों हाथों से सर को पकड़ा और जब उसने अपने हाथ पर खून देखा वह और भी घबरा गया ।
‘ ज्यादा बोलने का नतीजा तो अपनी ऑंखों से देख ही रहा है ना इसलिए अब आगे से चुप रहते हुए गाड़ी चलाओ । अब तो मुझसे तेरी जान मुझे अपने ठिकाने पर पहुॅंचा कर ही छूटेगी ।’ उस आदमी ने गणेश के कंधे पर बंदूक रखते हुए कहा ।
गणेश पैसों के लालच में आकर बुरी तरह फंस चुका था । वह मन ही मन ईश्वर को कहने लगा कि हे ईश्वर ! मैं तो ईमानदारी से रोजी – रोटी कमाने वाला आदमी हूॅं मुझे किस मुसीबत में तुम ने फंसा दिया । अपने परिवार के भूख का इंतजाम करने की इतनी बड़ी सजा मुझे मत दो । कुछ ऐसा करो कि मुझे वह सब ना करना पड़े जो मैं नहीं करना चाहता हूॅं ।
ईश्वर को याद करते हुए गणेश गाड़ी चला रहा था और धीरे – धीरे उसके सर से खून रिस्ता ही जा रहा था फिर भी वह गाड़ी को चलाए ही जा रहा था क्योंकि अब गाड़ी चलाना उसकी मजबूरी हो चुकी थी ।
‘ आगे पुलिस की चेकिंग हो रही है । अगर पुलिस ने हमें पकड़ लिया तो … ‘ गणेश ने हकलाते हुए कहा ।
‘ कुछ नहीं होगा । तुम गाड़ी चलाते जाओ ।’
उस आदमी ने गणेश से कहा ।
‘ चलो लाइसेंस दिखाओ ।’ पुलिस वाले ने गणेश से कहा ।
‘ जी ! दिखाते हैं एक मिनट रुकिए ।’ गणेश ने अपने ड्राइविंग लाइसेंस को अपने कनपटी के पास से इस तरह से पुलिस वाले को दिया कि उस लाइसेंस पर उसके सिर से निकल रहा खून लग जाए और पुलिसवाला उस खून को देख ले । पुलिस वाले ने भी उसे यह करते हुए देख लिया था और वह समझ गया था कि कुछ गड़बड़ तो जरूर है ।
‘ चलो ठीक है ! तुम जाओ ।’ कहते हुए पुलिसवाले ने सजाने का इशारा किया ।
गणेश की टैक्सी में बैठे उस आदमी के चेहरे पर विजयी मुस्कान फैल गई और उसने गणेश से कहा कि मैंने कहा था ना कि कुछ नहीं होगा और देखा तुमने कुछ नहीं हुआ ना । गणेश भी मन ही मन सोचने लगा कि सच में कुछ नहीं हुआ । उस पुलिस वाले ने उसके इशारे को समझा ही नहीं और ना ही लाइसेंस पर लगे खून को ही उसने पहचाना । गणेश दुखी मन से अपनी टैक्सी को आगे बढ़ाने लगा ।
गणेश २ किलोमीटर भी आगे नहीं गया होगा कि अचानक से उसकी गाड़ी की आगे पुलिस की जिप्सी आकर खड़ी हो गई जिसके कारण गणेश को अचानक से ब्रेक मारना पड़ा । जिप्सी के रुकते ही उसमें से ५ – ६ बंदूकधारी निकले और उन्होंने गणेश की टैक्सी को चारों तरफ से घेर लिया । गणेश और उसकी टैक्सी में पीछे बैठी उसकी सवारी कुछ समझ पाते इससे पहले ही एक पुलिसवाले ने टैक्सी का दरवाजा खोला और गणेश की सवारी का कॉलर पकड़ते हुए उसे नीचे गिरा दिया । ठंड की वजह से चारों तरफ कोहरा और अंधेरा ही अंधेरा था और ऊपर से ठिठुरती हुई सर्द भरी रात ।
‘ पूरी टैक्सी की तलाशी लो । मुझे लग रहा है टैक्सी में कुछ गड़बड़ है ।’ इंस्पेक्टर के इतना कहते ही टैक्सी की तलाशी शुरू हुई और जल्द ही उन्हें सूटकेस में रखा बच्चा मिल गया । जैसा कि उस आदमी ने गणेश से कहा था कि अगर पुलिस उसे पकड़ लेती है तो वह उसका भी नाम लेगा । ऐसा ही उस आदमी ने किया । उसने कहा कि इस बच्चे की चोरी में गणेश भी उसका बराबर का साथी है । उस आदमी के इतना कहते ही गणेश घबराहट और ठंड की वजह से कांपने लगा । इंस्पेक्टर साहब ने अपने हवलदार को इशारा किया कि वह गणेश को पकड़ लें ।
‘ अच्छा ! यह तेरा साथी है । अगर यह तेरा साथी रहता तो यह मुझे इशारे ना करता । इसके सिर पर से बह रहे खून को मैंने देख लिया था साथ ही अपने जिस खून को उसने लाइसेंस पर लगाया था और मुझे देते हुए इसने तेरी तरफ इशारा किया था मैंने वह देख लिया था । मेरी पुलिस वाली निगाह से तेरे हाथ में पकड़ी बंदूक छुप नहीं सकती थी । उस समय मैंने कुछ कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि जिसे तुम अपना साथी कह रहे हो उसे तुम कोई नुकसान ना पहुॅंचा सको । हमने तुम्हारे निकलने का इंतजार किया और उसके बाद से ही तुम्हारे पीछे लग गए थे और सही मौके पर हमने तुम्हें धर दबोचा है हमारे पास सूचना तो आई थी कि कोई आदमी बच्चा चुरा कर भागा है लेकिन हमें यह नहीं पता था किया वह तुम ही हो लेकिन इसकी वजह से आज हमने तुम्हें धर दबोचा है ।’ इंस्पेक्टर के इतना कहते ही गणेश ने उस इंस्पेक्टर के आगे अपने हाथ जोड़ लिए ।
‘ चलो पास के ही अस्पताल में सबसे पहले तुम्हारी मरहम पट्टी करवाते हैं उसके बाद मिलकर बात करते हैं ।’ इंस्पेक्टर ने गणेश के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ।
गणेश के कंधे पर हाथ रखते ही इंस्पेक्टर को महसूस हुआ कि इसे तो बुखार है । इंस्पेक्टर ने जल्दी से उसे सहारा दिया और जिप्सी में बिठाकर अस्पताल ले आए । गणेश का इलाज शुरू हो गया और इसी बीच उसकी पत्नी को भी उस सर्द कोहरे वाली रात में अस्पताल में बुला लिया गया । जब उसकी हालत कुछ ठीक हुई और उसने अपनी पूरी आपबीती इंस्पेक्टर साहब को सुना दी तब अस्पताल में उपस्थित सभी पुलिस वाले और वहाॅं मौजूद रोगियों और डॉक्टरों ने गणेश की उस सर्द रात में उसके द्वारा की गई बहादुरी के सम्मान में तालियां बजाई और साथ ही उसकी बहादुरी के लिए उसे इनाम की रकम देने का वादा भी इंस्पेक्टर साहब ने किया ।
##### समाप्त ########
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
” गुॅंजन कमल ” 💗💞💓
