रहिमन पानी राखिए ,बिन पानी सब सून 
   पानी गए ना उबरे ,मोती मानुष चून “
                 पानी की महत्ता को रहिमन  कवि जी ने तो बहुत पहले ही बता दी थी।……… …मोती ,मानुष ,चून तीनों का अस्तित्व तो पानी से ही है।                      
                  काश आज का मनुष्य पानी की महत्वता को समझ पाता कि पानी कितना अनमोल है ,हमारे लिए। पानी तो बेरंग,बेस्वाद और निर्मल होता है। पानी को जहरीला तो हम बनाते हैं। मनुष्य अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए हमेशा से प्रकृति को प्रदूषित करते आ रहा है। चाहे वह जल हो या वायु। इसका उदाहरण तो हमने लॉकडाउन में ही देख लिया ,जब मनुष्य अपने घरों में कैद था।तो वहीं प्रदूषित यमुना नदी कितनी निर्मल हो गई थी। हम सबको मिलकर हमारे नदियों के जल को प्रदूषित होने से बचाना होगा ताकि इन नदियों का जल उन लोगों तक आसानी से पहुंच जाए जो मात्र पीने के पानी के लिए ही कितने मिलो सफर तय करते हैं तब जाकर उन्हें पानी नसीब हो पाता हैl 
  
जहरीला पानी नहीं है।पानी में मिलते जहर है -जो हमारे स्वार्थ के कारण पनपती है उसे रोकना होगा।
                              मनीषा ठाकुर(कर्नाटक)
                                                  
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