कितने प्यार से माँगी थी ना
तुमने,अलग होने से पहले
पर क्या करता मैं!!
मैं जानता था, उस रात
बहुत रोई थी तुम,
निष्ठुर बन जब तुम्हें
मना किया था मैंने
अपनी निशानी देने से,
जानता था, बहुत अच्छे से
उस निशानी के बदले
बहुत कुछ सुन लेती तुम,
वही तो कहना नहीं चाहता था
कि मुझे कितना विश्वास है
तुम्हारी ईमानदारी पर
और अपनी कायरता पर,
इसलिए तो उस भ्रम से
ये भ्रम अच्छा है ना कि
ये दोस्ती कितनी अच्छी है,
सही कहा ना !!
✍️शालिनी गुप्ता प्रेमकमल 🌸
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)
