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माता भुवनेश्वेरी की पुत्र पिता विश्वनाथ की शान
गुरु रामकृष्ण परमहंस की शिष्य थे वो महान
भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म की गँगा बहाया
बहुत भाग्यशाली है हम हिन्दू जो स्वामी विवेकानंद जैसे गुरु पाया है 
परिवार की दूरदशा होते हुए भी गुरु सेवा उत्तम माना
त्याग हर सुभीदा जीवन मे सन्यास को दिल से अपनाया
नीला आसमान,नीला समुन्द्र व नीला ही अंनत नारायण का है माया
नरेन्द्र नाथ दत्त से ज्ञान की सागर स्वामी विवेकानंद नाम की सम्मान पाया है 
अपने आत्मविश्वास व निष्ठा से शिकागो मे विचार की गँगा बहाये
भारतीय संस्कृति शिक्षा वहाँ के धरती पर भी परचम लहराए
द्वेष जिस दिल मे था उस मन मे भी प्रेम की परिभाषा शिखाए
बहुत भाग्यशाली है हम हिन्दू जो स्वामी विवेकानंद जैसे गुरु पाया है 
भय करना सबसे पाप और निडर से जिना हिन्दुओ की आन है
चलते रहना तब तक ज़ब तक लश्य अपना होजाता नहीं हासिल है
खुद को कभी दुर्बल न समझो हर किसी को देते रहे वो ज्ञान
बहुत भाग्यशाली है हम हिन्दू जो स्वामी विवेकानंद जैसे गुरु पाया है
जिन्होंने ने सनातन धर्म,वेदांत व आध्यात्मिक सर्वश्रेठ गुरु थे
मात्र भूमि के प्रति सच्ची निष्ठा व भारत की माँ की गुरुर थे
बिद्या को सर्वश्रेष्ठ माना हर किसी मन को जागरूत किये
बहुत भाग्यशाली है हम हिन्दू जो स्वामी विवेकानंद जैसे गुरु पाया है
खुद को भले कष्ट हो पर औरो को कोई मुश्किल न छुए
धन्य है वो भूमि कलकत्ता की जहाँ गुरु देव जी जन्म लिए
गर्व से मनाते रहे हर भारतीय राष्ट्रीय युवा दिवस संसार मे
बहुत भाग्यशाली है हम हिन्दू दिल से स्वामी विवेकानंद जयंती मनाये….!!
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स्वामी विवेकानंद जी
सारे हिंदुत्व की सर्वश्रेष्ठ गुरु है
जिन्होंने सनातन धर्म व
भारतीय संस्कृति की स्थापना किया था
हमारे जीवन के मार्गदर्शक और
ज़िन्दगी जीने की एक से एक
ज्ञान की सागर बांधे है
जहाँ हम हारने लगते है ज़िन्दगी मे
वहाँ उनकी दी हुई शिक्षा ही
हमें ज़िन्दगी के मुश्किलों से
लड़ने की हिम्मत प्रदान करती है
हर कोई इस दुनिया मे
एक महत्वपूर्ण कार्य के लिए ही आया है
बिना वजह किसी का जन्म ईश्वर नहीं देते
इसीलिए कह गए गुरुदेव जी ने
खुद को कभी बेवजह नहीं समझना चाहिए
आत्मविश्वास व मन की एकाग्रता
ज़िन्दगी मे सबसे बहुत महत्वपूर्ण है
ज़िन्दगी के राह मे
तब तक चलते रहना चाहिए
ज़ब तक हमें
अपना लश्य की प्राप्ति न होजाए
गर हम किसीका मदद नहीं कर सकते है
तो उसका निंदा करनेका भी हमें कोई अधिकार नहीं है
लेकिन आजकल के दुनिया मे
हम हिन्दू ही अपना अस्तित्व खोते जारहे है
जहाँ महा पुरुषो ने
देश विदेश की यात्रा व हिन्दू संस्कृति का प्रचार
अपने हिन्दू की गौरव सर पगड़ी न उतारा
जहाँ एक से एक महिलाये
हाथ मे चूडियो के साथ तलवार उठाई
दुश्मनो पर भारी पड़ गयीं पर सर से आँचल न गिरा
वही आजकल के युवा पीढ़ी
अपने ही देश मे
अपना भारतीय सभ्यता भूलते जारहे है
स्वामी विवेकानंद की जन्मदिन को
यूँही तो राष्ट्रीय युवा दिवस नहीं मानते है
क्योकि हर प्रेणादायक ज्ञान की ज्योत
स्वामी जी ने युवाओं के लिए जलाया था
उसका प्रकाश
हर भारतीय की जीवन को रोशन करता है
जन्म से लेकर किशोर अवस्ता तक
माता पिता हर पल
हमें अपने परवरिश मे ढालते है
पर उसके बाद हम अपने जीवन को
किस तरह सजाते है ये हम पर होता है
सिर्फ बिद्यालय मे पढ़ना ही एक शिक्षा का मार्ग तो नहीं है
हमारे ज़िन्दगी के हर क्षण मे
हम एक विद्यार्थी होते है
वो अपने बड़ो से हो या छोटो से 
दुनिया से हो या वक़्त से
हमें हर पल हर कदम पर
कुछ न कुछ सिखने को मिलता है
जिन्हे हम अपनी अज्ञानता व नादानियों से
उस ज्ञान को नज़रअंदाज़ करते जाते है
लेकिन कब तक ऐसा होगा
कभी तो हमें अपने जीवन नाम युद्ध से लड़ना होगा
तो क्यूँ न हम सामने आए हालातो से
डट्ट कर सामना करे..?
गुरु जी के किया हुआ हिन्दू सभ्यताओं की मान
हम गर अभी से भी सम्मान करे तो
हमारी एक कोशिश
कयी ज़िन्दगीयों मे प्रकाश भर सकती है
भले हम दुनिया के किसी भी कोने मे रहते हो
लेकिन अपने दिल से
अपना धर्म व संस्कृति को कभी भूले
जहाँ भी जाए जहासे भी भी गुज़रे
हर एक संस्कृति मे
भारतीय संस्कृत की प्रकाश फैलाते चले
जो हमारे धर्म गुरु स्वामी विवेकानंद जी की उद्देश्य था
जैसे हर देश विदेश मे भी
अपनी भारतीय संस्कृति की परचम लहराए थे
मोह माया मे उलझी इस समाज की
एक आर्यसमाज की स्थपना किया
जिनके विचार व ज्ञान प्रकाश से
उज्ज्वल होकर हमारा जीवन
एक लश्य को चुनने मे सक्षम होपाता है
इसीलिए जिस हर्षउल्लास से
हम राष्ट्रीय युवा दिवस व
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती मनाते आये है
उसी तरह अपने सनातन धर्म व
भारतीय संस्कृति की शान को बढ़ाते रहे।।
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नैना…. ✍️✍️
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