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हम जानते हैं कि “स्वदेश” का मतलब क्या है..? मतलब होता है अपना देश 🥰। यहां अपना देश से हमारा अभिप्राय ये नहीं है कि हम अपने ही देश के शासक द्वारा हमें प्रताड़ित किया जाता हो🥲, शासक जब भी चाहे हम जनता पर अपनी तानाशाही दिखाए🙄। स्वदेश का मतलब मैं ये भी नहीं कह सकता कि जिस “स्वदेश” में हम जन्म लिए वही देश के सैन्य ताकत हमे स्वदेश छोड़ने को मजबूर करे 🥲, ये कैसा स्वदेश जिसकी जनता खुश न हो ..?  तो ऐसे सैन्य प्रधान और तानाशाही वाले देश की जनता भी दो लाइन अपने “स्वदेश” की तारीफ करने से भी कतराते हैं । जैसे:– उत्तर कोरिया , म्यांमार आदि ।
मैं किसी की भी आलोचना नहीं कर रहा लेकिन मुझे जो अच्छा लगा वही लिखा है । अरे हां मैं भी कहा उलझ गया 😊।
तो चलिए समझते हैं नीचे लिख पंक्तियों के माध्यम से “🌺स्वदेश🌺” की भूमिका या कह ले “स्वदेश” शब्द होने का अर्थ……
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चाह नहीं है मैं रखता छल कपट,
सबके दिलों की माला का जोड़ हूं,
बांध जो देता हूं रिश्तों की गहराई में,
मैं ऐसे लोकशक्ति का “स्वदेश” कहलाऊं ।
नही भटकता कोई भी इधर उधर,
जो एक बार जन्म ले लेता है ,
सबको निःस्वार्थ भाव से प्रेम कराऊं,
क्योंकि “स्वदेश” हमें सिखलाता है ।
जो एक बार चले जाए “स्वदेश” छोड़कर,
उनकी यादों मै भी जीने का सहारा बन जाऊं,
ऐसा पावन “स्वदेश” भारत है हमारा ,
जिसमें परम मिठास की सुगंध है दिखती ।
हम उस भूमि के कर्जदार हैं ,
जिसने हमें नई उम्मीद, नई खोज दी है,
जहां लाखों जवान जाने गंवाए मिट्ठी के खातिर,
इसलिए मैं मातृभूमि “स्वदेश” भी कहलाऊं ।
जब जनता और सैनाओ में अटूट विश्वास हो , 
राजा और प्रजा में न कोई मतभेद हो,
दुश्मनों की जब दांत खट्टे करने हो,
तब कर देता हूं सब नागरिक एक,
इसलिए मैं हूं कहलाऊं एक “स्वदेश”🌹।
अपनी रंग रूप और वेशभूषा है मेरी,
जहां विविधताओं में भी एकता होती है,
मंदिर, मस्जिद , गिरजाघर इसी भूमि पर,
न कोई द्वेष भावना सिखलाऊं,
गरीबों की भी एक नई उम्मीद जगाऊँ,
इसलिए मैं अपने विहार की “स्वदेश” कहलाऊं ।
कर लेते हैं राजा भी मनमानी अपनी,
जब जनता जागरूक न हो,
दबा दी जाती है उनकी बोलने की आजादी,
जब रास दिल में न आई हो,
क्योंकि यही “स्वदेश” का कानून है ।
जिसकी लाठी उसकी भैंस ,
ये जो आदिम युग की कहावत है, 
अहम संस्कृत, तेलगु, तमिल, हिंदी आदि च वदामी,
अनेकों भाषाओं का मेल “स्वदेश” कहलाऊं ।
राजनीति की दांव पेच को लेकर आऊं,
खुली आंखों तले धूल झौंक जनताओं पर जो राज करूं,
सितम जब ढाने होती अपनी संस्कृति पर,
मैं ऐसे नीच और उच्च स्वभाव रखने वाला “स्वदेश” कहलाऊं ।
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🙏🙏🙏🙏🙏🙏
जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏🙏
❤️✍️✍️✍️ मनीष kr. marjaavaan 💘
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