नरबदा परकम्मा
रेवा मैया बहें कल कल धार।
चलो परकम्मा खों चलिये।।
पईसा ने लईयो रूपैया ने लईयो।
भाव भक्ति से भर लो मन खों आज।।
अमरकंटक सें चलनो परहै।
मैया की धारा खों पार ने करने।।
खैबो रहबो सब मैया के भरोसे।
बे हैं सबकी पालनहार।।
तन मन धन सें संकलप कर लेव।
बे तो नईया लगा दैहें पार।।
आसा कय रई कर लेव भरोसो।
जीबन हो जैहे आनंद पार।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित  डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
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