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दुनिया मे अनेको कला ईश्वर ने बनाया है
और हर किसी को
अपने ज़िन्दगी मे कोई न कोई कला
बहुत ही महत्व रखता है
या तो हम ज़िन्दगी मे कुछ देर से
किसी कलाओ को अपनाते है
या फिर हमारे दिल मे
बचपन से ही किसी कला की चाह
हमें अपनी ओर खींचती ले जाती है
ये किसी एक की बात नहीं है
दुनिया की हर एक इंसान
या कहें तो देवी देवताओं भी
अपने जीवन मे हर एक कला को
उसके स्थान पर एक महत्व दिया है
जैसे की पढ़ना लिखना भी एक कला है
हर किसी दिल मे
अपना स्थान प्राप्त कर लेना हो
या अनेको कलाओ मे से
एक खास कला नित्य कला कहलाता है
जो हर नित्य करने वाले
भगवान शिव के नटराज स्वरूप प्रतिमा को
खुद को उनके चरणों मे समर्पित कर देते
जिनसे भगवान शिव की कृपा
ऊन पर सदा बनी रहती है
उसी तरह संगीत कला के प्रेमी 
माता स्वरस्वती जी को
अपने स्वर और अपने जीवन को
उनकी चरणों मे अर्पण कर देते है
जिसने वो कहीं भी गाये
चाहे कुछ भी गुनगुनाएं
हर एक मन मे एक मधुर रस घुल जाता है 
ऐसे ही इन कलाओ के प्रेमी
नित्य कला कथक की गुरु
छंद की लय जोड़ना भी
एक अगल ही खास कला थीं
बचपन से ही जिन्होंने
खुद को सूर और ताल के संगम मे बाँध लिया
जिनको हर भारतीय ने
अपने दिल से उनके कलाओ को सम्मानित किया
वही पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज की
श्रद्धांजलि देते हुए दिल से नमन करते है 
जो एक मशहूर कथक गुरु,
एक नर्तक,कोरियोग्राफर, एक प्रसिद्ध गायक
और एक कंपोजर के साथ
हम सब को हमारे संस्कृति की लय मे बांधते थे
ईश्वर उनके आत्मा को सदैव शान्ति प्रदान करे
और उनके कलाओ की खुशबू
संसार मे हर तरफ
सूर्य की प्रकाश की भांति फैलती रहे….!!
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नैना…. ✍️✍️
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