आज समाचारों की तरफ रुख किया तो ज्ञात हुआ कि हाल ही में लोक प्रिय भारतीय कथक नर्तक और शास्त्रीय गायक पंडित बिरजू महाराज का 83 साल की उम्र में निधन हो गया है। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात दिल्ली के एक हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांसे ली।बिरजू महाराज के निधन की ख़बर से पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गयी है।
बिरजू महाराज प्रसिद्ध भारतीय कथक, नर्तक व शास्त्रीय गायक थे।ये शास्त्रीय कथक नृत्य के लखनऊ कालिका बिना बिंदादिन घराने के अग्रणी नर्तक रहे,पंडित जी कथक नाटकों के महाराज परिवार के वंशज रहे जिसमें कई प्रमुख विभूतियों में इनके दो चाचा और ताऊ शंभू महाराज और लच्छू महाराज तथा उनके खुद के पिता और गुरु महाराज भी आते हैं लेकिन इनका पहला जुड़ाव नृत्य से ही था।
बिरजू महाराज ने केवल 23 वर्ष की आयु में ही नई दिल्ली के ‘संगीत भारती’ में नृत्य की शिक्षा देना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में ही भारतीय कला केंद्र में सिखाना शुरू किया,कुछ समय बाद उन्होंने कथक केंद्र में शिक्षण कार्य शुरू कर दिया।यहां पर वे संकाय के अध्यक्ष थे तथा निदेशक भी रहे, इसके बाद 1998 में उन्होंने वहां से सेवानिवृत्ति पाई इसके बाद ‘कलाश्रम’ नाम से दिल्ली में एक नाट्य विद्यालय खोला।
उन्होंने विभिन्न प्रकार की नृत्यवालियों जैसे गोवर्धन लीला, माखन चोरी, मालती माधव, कुमारसंभव व फाग बहार इत्यादि की रचना की उन्हें ताल वाद्दो की विशिष्ट अंतर प्रेरणा भरी समझ थी।जैसे तबला, पखावज, ढोलक नाल और तार वाले वाद्य वायलिन, स्वरमंडल व सिताड़ इत्यादि के सुरों का भी गहरा ज्ञान था।पंडित महाराज ने हजारों संगीत प्रस्तुतियां भारत एवं भारत के बाहर भी दी।
बिरजू महाराज कथक नृत्य के लखनऊ कालका-बिंदडिन घराने के प्रमुख प्रतिपादक रहे और दिल्ली में नृत्य स्कूल कलशराम के संस्थापक थे,जो कथक और संबंधित विषयों के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने पर केंद्रित हैं। स्कूल में वे परंपरागत मापदंडों का उपयोग नई प्रस्तुतियों के नृत्य के लिए करते योंकि वह दर्शकों को व्यक्त करने की इच्छा रखते रहे कि शास्त्रीय शैली बहुत ही आकर्षक, दिलचस्प और सम्मानजनक हो सकती है।
बिरजू महाराज को अपने क्षेत्र में आरम्भ से ही काफ़ी प्रशंसा एवं सम्मान मिले, जिनमें 1986में पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा कालिदास सम्मान प्रमुख हैं। इनके साथ ही इन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं खैरागढ़ विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि मानद मिली।
बिरजू महाराज का बॉलीवुड से गहरा नाता,रहा उन्होंने कई फिल्मों के गीतों का नृत्य निर्देशन किया है। बिरजू महाराज ने सत्यजीत राय की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी के संगीत की रचना की थी, और उसके दो गानों पर नृत्य के लिए गायन भी किया। उसके अलावा 2002 में बनी हिंदी फिल्म देवदास में एक गाने ‘काहे छेड़ छेड़ मोहे ‘का नृत्य संयोजन भी किया और इसके अलावा और भी कई हिंदी फ़िल्मों जैसे डेढ़ इश्किया, उमराव जान और संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित बाजी राव मस्तानी में भी कथक नृत्य का संयोजन किया। फिल्म निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की फिल्म ‘ दिल तो पागल है’, ‘गदर एक प्रेम कथा’ का नाम में प्रमुखता से लिया जाता है।2016 में हिन्दी फ़िल्म बाजीराव मस्तानी में “मोहे रंग दो लाल ” गाने पर नृत्य-निर्देशन के लिये फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला।
ऐसी शास्त्रीय जगत की महान विभूति को भावभीनी श्रद्धांजलि।
शैली भागवत ‘आस’✍️
